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यूपी चुनाव से पहले SIR पर बड़ा बवाल! क्या चुनाव आयोग के अंदर ही उठे सवाल? अखिलेश के दावे से मचा हड़कंप

SIR को लेकर चुनाव आयोग के भीतर दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों की रिपोर्ट सामने आने के बाद अखिलेश यादव ने सवाल उठाए हैं। जानिए पूरा मामला और 14 आपत्तियों से जुड़ी जानकारी।

Akhilesh Yadav

उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर सियासी बहस के बीच चुनाव आयोग के अंदर दर्ज आपत्तियों की एक रिपोर्ट ने नया मुद्दा खड़ा कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार आयोग के कुछ फैसलों और आदेशों पर औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दोनों आयुक्तों ने कुछ फैसलों को उनकी जानकारी या सहमति के बिना लिए जाने पर सवाल उठाए। इन आपत्तियों में नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम जोड़ने और हटाने तथा चुनावी डेटा के प्रबंधन जैसे मुद्दे शामिल बताए गए हैं।

13 करोड़ नाम हटने के दावे के बीच बढ़ी चर्चा

SIR को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा मतदाता सूची में हुए बदलावों की है। रिपोर्ट के अनुसार, बिहार से शुरू हुई SIR प्रक्रिया के बाद 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ड्राफ्ट मतदाता सूचियों में 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए हैं। यहां यह समझना जरूरी है कि ड्राफ्ट सूची से नाम हटना अपने आप में किसी व्यक्ति का स्थायी रूप से मतदान का अधिकार खत्म होना नहीं है। SIR प्रक्रिया में दावों और आपत्तियों के जरिए पात्र मतदाताओं को अपना नाम सूची में बनाए रखने या दोबारा शामिल कराने का अवसर मिलता है। इसी बीच दोनों चुनाव आयुक्तों की ओर से मतदाता डेटा और आयोग की तकनीकी व्यवस्था को लेकर उठाई गई आपत्तियों ने बहस को और तेज कर दिया है।

अखिलेश यादव ने उठाए सवाल, सुप्रीम कोर्ट से की अपील

इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि अगर आयोग के दो सदस्य लगातार फैसलों पर आपत्ति दर्ज कर रहे हैं, तो यह गंभीर विषय है। अखिलेश ने आरोप लगाया कि संवैधानिक संस्था के सदस्यों को अगर अपनी बात रखने की स्वतंत्रता नहीं मिलती है तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से मामले पर स्वतः संज्ञान लेने की मांग भी की। दूसरी ओर, रिपोर्ट में सामने आए आरोपों और आपत्तियों पर चुनाव आयोग की आधिकारिक प्रतिक्रिया इस समय इस खबर का महत्वपूर्ण अगला पहलू है। इसलिए SIR को लेकर लगाए जा रहे राजनीतिक आरोपों और आयोग के आधिकारिक रिकॉर्ड को अलग-अलग समझना जरूरी है।

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