समाजवादी पार्टी की कैराना सांसद इकरा हसन (Iqra Hasan) ने महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव और सामाजिक दबाव को लेकर अपने अनुभव साझा किए हैं। महिलाओं के साथ बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि एक महिला के तौर पर सार्वजनिक जीवन में आगे बढ़ना कई बार आसान नहीं होता। उन्होंने अपनी पहचान का जिक्र करते हुए कहा कि वह मुस्लिम और ओबीसी समुदाय से आती हैं, इसलिए उन्हें अलग-अलग स्तरों पर मुश्किल परिस्थितियों का सामना करना पड़ा है। इकरा हसन ने यह भी कहा कि महिलाओं के काम को कई बार उनके काम के बजाय उनके कपड़ों, चरित्र, पहचान या निजी जिंदगी से जोड़कर देखा जाता है।
पुरुषों और महिलाओं को लेकर अलग नजरिए पर सवाल
इकरा हसन ने कहा कि पुरुषों के किसी क्षेत्र में आगे बढ़ने पर आमतौर पर उनके पहनावे या निजी जिंदगी को चर्चा का केंद्र नहीं बनाया जाता, लेकिन महिलाओं के मामले में स्थिति अलग दिखाई देती है। उनके मुताबिक, किसी महिला की शादी हुई है या नहीं, उसका पहनावा कैसा है या उसकी निजी पहचान क्या है, इन बातों को उसके काम से जोड़ना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे अनुभवों के बीच वह खुद भी सीख रही हैं कि इस तरह की बातों का सामना कैसे किया जाए।
महिला जनप्रतिनिधियों के साथ व्यवहार का भी उठाया मुद्दा
सपा सांसद ने प्रशासनिक कामकाज के दौरान अपने अनुभव का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि कई मौकों पर पुरुष अधिकारी महिला जनप्रतिनिधि से सीधे बात करने के बजाय उनके साथ मौजूद किसी अधीनस्थ अधिकारी से संवाद करते हैं। इकरा हसन के अनुसार, देखने में यह छोटी बात लग सकती है, लेकिन इसका असर महिलाओं के नेतृत्व और सम्मान से जुड़ा है। उन्होंने महिलाओं की भागीदारी और नेतृत्व बढ़ाने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि महिलाओं को अपने अधिकार और जिम्मेदारी के लिए आत्मविश्वास के साथ आगे आना चाहिए।
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