तुर्किये की राजधानी अंकारा में आयोजित NATO शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बड़ा बयान दिया। मीडिया से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच हुआ मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) अब उनके अनुसार प्रभावी नहीं रहा। उन्होंने कहा कि हालिया घटनाओं के बाद इस समझौते का भविष्य लगभग खत्म हो चुका है। ट्रंप के इस बयान के बाद एक बार फिर पश्चिम एशिया की स्थिति और अमेरिका-ईरान संबंधों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, इस समझौते की वर्तमान कानूनी स्थिति को लेकर संबंधित देशों की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं।
ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई का भी किया जिक्र
बातचीत के दौरान ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ने हाल ही में ईरान से जुड़े खतरनाक तत्वों के खिलाफ कड़ी सैन्य कार्रवाई की है। उन्होंने कहा कि यह कदम अमेरिका की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया। ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व की भी आलोचना करते हुए तीखी टिप्पणी की और कहा कि मौजूदा हालात में दोनों देशों के रिश्ते बेहद तनावपूर्ण हो चुके हैं। उनके बयान से साफ संकेत मिला कि अमेरिका फिलहाल ईरान के प्रति सख्त रुख बनाए रखना चाहता है। हालांकि, ईरान की ओर से इन बयानों पर क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया आती है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।
क्षेत्रीय तनाव के बीच बढ़ी वैश्विक चिंता
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर पूरे पश्चिम एशिया पर पड़ता दिखाई दे रहा है। हाल के दिनों में समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों को लेकर भी चिंता बढ़ी है। इसी बीच मुस्लिम वर्ल्ड लीग (MWL) ने होर्मुज जलडमरूमध्य में कतर और सऊदी अरब से जुड़े जहाजों को कथित रूप से निशाना बनाए जाने की घटनाओं की निंदा की है। संगठन ने कहा कि ऐसी घटनाएं क्षेत्रीय शांति और वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती हैं। साथ ही सभी पक्षों से संयम बरतने और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान करने की अपील भी की गई है।
आगे क्या होगा, दुनिया की नजर हालात पर
यदि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ता है तो इसका असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, तेल बाजार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। फिलहाल ट्रंप के ताजा बयान ने एक बार फिर इस मुद्दे को सुर्खियों में ला दिया है। आने वाले दिनों में अमेरिका, ईरान और अन्य सहयोगी देशों की आधिकारिक प्रतिक्रियाएं तय करेंगी कि हालात बातचीत की ओर बढ़ते हैं या तनाव और गहराता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है।
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