ईरान इस समय अपने सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई की मौत के गहरे शोक में डूबा हुआ है। पूरे देश में पांच से छह दिनों के राजकीय मातम का ऐलान किया गया है, लेकिन इसी बीच स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से एक दहला देने वाली खबर सामने आई है। हॉर्मुज जलडमरू मध्य से गुजर रहे दो व्यापारिक जहाजों पर अचानक मिसाइलों से ताबड़तोड़ हमला कर दिया गया। इस हमले के बाद पूरे इलाके में बारूद की गूंज सुनाई दी और दोनों जहाजों को भारी नुकसान पहुंचने की खबर है। हालांकि, राहत की बात यह रही कि इस भीषण हमले में जहाजों पर सवार किसी भी क्रू मेंबर की जान नहीं गई है और सभी सुरक्षित बताए जा रहे हैं।
अमेरिका का ईरान पर सीधा आरोप और दावा
इस अचानक हुए हमले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सनसनी मचा दी है। अमेरिकी रक्षा विभाग ने इस घटना पर बेहद कड़ी प्रतिक्रिया दी है। अमेरिकी अधिकारियों और रक्षा विशेषज्ञों ने इस हमले के लिए सीधे तौर पर ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को जिम्मेदार ठहराया है। वरिष्ठ पत्रकार बराक राविद की रिपोर्ट के अनुसार, जहाजों पर दागी गईं मिसाइलें सीधे निशाने पर लगीं, जिससे जहाजों को गंभीर क्षति पहुंची है। अमेरिका का मानना है कि ईरान ने जानबूझकर इस संवेदनशील रूट पर तनाव बढ़ाने के लिए इस कार्रवाई को अंजाम दिया है।
सीजफायर के बाद फिर भड़की तनाव की चिंगारी
कुछ समय पहले ही अमेरिका और ईरान के बीच भीषण सैन्य टकराव के बाद एक नाजुक सीजफायर यानी युद्धविराम पर सहमति बनी थी। लेकिन जमीन पर हालात अब भी बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। अमेरिकी हमले में अपने सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई और कई शीर्ष अधिकारियों को खोने के बाद ईरान गुस्से में है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान ने आग में घी डालने का काम किया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनकी सेना ने ईरान को करारा जवाब दिया है और अब उन्हें शोक मनाने का समय मिला है। इस बयान के तुरंत बाद हुए इस हमले ने दोनों देशों के बीच की तल्खी को एक बार फिर चरम पर पहुंचा दिया है।
अंतिम संस्कार के बीच सस्पेंस में दुनिया
फिलहाल ईरान के भीतर खामेनेई के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया चल रही है। उनके पार्थिव शरीर को पवित्र शहर कोम की जमकरन मस्जिद ले जाया गया है, जिसके बाद इसे इराक भी ले जाया जाएगा। आगामी 9 जुलाई को उनके गृह शहर मशहद में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाना है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच, जहाजों पर हुए मिसाइल अटैक को लेकर ईरान सरकार या उसकी सेना की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक बयान या सफाई सामने नहीं आई है। ईरान की यह चुप्पी दुनिया भर के देशों को डरा रही है कि कहीं यह किसी बड़े पलटवार की शुरुआत तो नहीं है।
