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ईरान के मिसाइल हमले के बाद बहरीन क्यों पहुंचे एस. जयशंकर? पीएम मोदी का खास संदेश और बड़े मिशन का खुलासा

ईरान-अमेरिका तनाव के बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर बहरीन पहुंचे। जानिए पीएम मोदी का खास संदेश, बहरीन के शाह से मुलाकात, भारत-बहरीन रिश्तों पर चर्चा और पूरे दौरे की अहम बातें।

एस. जयशंकर

विदेश मंत्री एस. जयशंकर इन दिनों खाड़ी देशों के दौरे पर हैं। इसी क्रम में वह कतर के बाद बहरीन पहुंचे, जहां उन्होंने बहरीन के शाह हमद बिन ईसा अल खलीफा और युवराज व प्रधानमंत्री सलमान बिन हमद अल खलीफा से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुभकामनाएं और संदेश भी पहुंचाया। बैठक में भारत और बहरीन के बीच रिश्तों को और मजबूत बनाने, व्यापार, निवेश और आपसी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। जयशंकर ने बहरीन में रहने वाले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और उनके बेहतर जीवन के लिए वहां की सरकार का आभार भी जताया। भारत ने साफ किया कि बहरीन उसके महत्वपूर्ण मित्र देशों में शामिल है और दोनों देशों के रिश्तों को आगे भी मजबूत किया जाएगा।

विदेश मंत्रियों की बैठक में कई अहम मुद्दों पर चर्चा

बहरीन दौरे के दौरान एस. जयशंकर ने वहां के विदेश मंत्री डॉ. अब्दुल्लतीफ बिन राशिद अल जयानी से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं ने भारत-बहरीन संबंधों को नई ऊंचाई देने के साथ-साथ पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात पर भी विस्तार से चर्चा की। ऊर्जा, व्यापार, निवेश, सुरक्षा और क्षेत्रीय सहयोग जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दे बैठक का हिस्सा रहे। इसके अलावा जयशंकर ने बहरीन में रहने वाले भारतीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात की और उनकी समस्याओं तथा सुझावों को सुना। भारत लगातार खाड़ी देशों के साथ अपने संबंध मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है, क्योंकि इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक रहते हैं और भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा भी यहीं से पूरा होता है।

पश्चिम एशिया के तनाव के बीच भारत की बढ़ी सक्रियता

जयशंकर का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब पश्चिम एशिया में हालात तेजी से बदल रहे हैं। हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के बाद क्षेत्र में कई घटनाएं सामने आईं। युद्धविराम से पहले बहरीन पर मिसाइल और ड्रोन हमलों की खबरों ने पूरी दुनिया का ध्यान इस इलाके की ओर खींचा था। अब दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की कोशिशें जारी हैं और कतर तथा ओमान जैसे देशों ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई है। ऐसे समय में भारत का लगातार खाड़ी देशों के संपर्क में रहना उसकी सक्रिय विदेश नीति का हिस्सा माना जा रहा है। भारत का उद्देश्य क्षेत्र में शांति, स्थिरता और अपने नागरिकों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

आगे भी जारी रहेगा जयशंकर का अहम दौरा

बहरीन के बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर कुवैत और ओमान का भी दौरा करेंगे। इसके बाद वह 13 जुलाई को न्यूयॉर्क जाएंगे, जहां संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 2028-29 के कार्यकाल के लिए भारत के अभियान की शुरुआत करेंगे। इसके बाद 14 और 15 जुलाई को वह बेल्जियम के ब्रसेल्स में भारत-यूरोपीय संघ व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद की बैठक में हिस्सा लेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि खाड़ी देशों से लेकर यूरोप तक जयशंकर का यह दौरा भारत की विदेश नीति को नई मजबूती देने और वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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