Iran US War: ईरान के सबसे महत्वपूर्ण तेल केंद्र खार्ग आइलैंड (Kharg Island) पर ताबड़तोड़ हमले किए गए हैं। यह हमला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दी गई डेडलाइन से ठीक पहले हुआ, जिसमें उन्होंने ईरान को हॉर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के लिए समय दिया था।
खार्ग आइलैंड ईरान के लिए बेहद अहम है क्योंकि देश का लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल यहीं से दुनिया भर में भेजा जाता है। यहां 3 करोड़ बैरल तेल जमा करने की क्षमता है। हमले के बाद ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने चेतावनी दी है कि अब उनके ‘धैर्य की सीमा समाप्त’ हो गई है।
ईरान की जवाबी धमकी: सब कुछ राख कर देंगे
हमले के बाद ईरानी सेना ने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को सीधी चेतावनी दी है। ईरान ने कहा कि अगर उनके तेल और गैस ठिकानों को नुकसान पहुंचाया गया, तो वह मिडिल ईस्ट के अन्य देशों के ऊर्जा ठिकानों को “राख के ढेर” में बदल देगा।
विशेषज्ञों के अनुसार यह चेतावनी वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए चिंता का कारण बन सकती है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी और सप्लाई रुकने का खतरा अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महसूस किया जा रहा है।
ट्रंप की डेडलाइन और अमेरिका का रुख
अमेरिका ने पिछले हफ्ते खार्ग आइलैंड पर कब्जा करने की धमकी दी थी। रविवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि ईरान को 48 घंटे के भीतर हॉर्मुज जलडमरूमध्य का रास्ता साफ करना होगा। इससे पहले अमेरिका ने मिलिट्री ठिकानों और मिसाइल बंकरों पर हमले किए थे, लेकिन तेल के कुओं को नुकसान नहीं पहुंचाया गया था।
ईरान ने अमेरिकी युद्धविराम प्रस्ताव को भी ठुकरा दिया है। इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है। विश्लेषकों का कहना है कि इस हमले के बाद खाड़ी में नई जंग की स्थिति बन सकती है।
क्यों खास है ‘खार्ग आइलैंड’?
खार्ग आइलैंड को “फॉरबिडन आइलैंड” भी कहा जाता है क्योंकि यहां सुरक्षा का कड़ा पहरा रहता है। यह ईरान के तट से 16 मील और हॉर्मुज जलडमरूमध्य से 300 मील दूर है। इस द्वीप पर ईरान का तेल निर्यात केंद्र स्थित है और दुनिया की अर्थव्यवस्था काफी हद तक इस सप्लाई पर निर्भर है।
इस हमले के बाद वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है। तेल की कीमतों में तेजी और सप्लाई रुकने की संभावना से अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
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