अमेरिका और ईरान के बीच एक महीने से अधिक समय से जारी संघर्ष को खत्म करने के लिए अब संभावित युद्धविराम का रास्ता खुलता दिख रहा है। पाकिस्तान ने इस दिशा में एक विस्तृत ड्राफ्ट तैयार किया है, जिसमें दो चरणों वाला एग्रीमेंट शामिल है। पहले चरण में तत्काल सीजफायर यानी युद्ध विराम लागू किया जाएगा, जबकि दूसरे चरण में एक व्यापक और स्थायी समझौता तय किया जाएगा। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही उम्मीद जताई थी कि सोमवार तक ईरान डील के लिए तैयार हो सकता है। इस प्रस्तावित योजना में ईरान के फ्रीज किए गए एसेट्स को रिलीज करना भी शामिल है, जिससे दोनों पक्षों के बीच आर्थिक और कूटनीतिक तनाव कम किया जा सके।
आसिम मुनीर ने रातभर की वार्ता
पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने इस डील को अंतिम रूप देने के लिए अमेरिका और ईरान दोनों से लगातार संपर्क बनाए रखा। सूत्रों के अनुसार मुनीर ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ पूरी रात बातचीत की। इस चर्चा में दोनों पक्षों की शर्तों और संभावित सीजफायर की समय सीमा पर विस्तार से बात की गई। पाकिस्तान की कूटनीतिक पहल का उद्देश्य मध्य-पूर्व में तनाव कम करना और वैश्विक तेल आपूर्ति को प्रभावित होने से बचाना है। हालांकि, तेहरान ने स्पष्ट कर दिया है कि अस्थायी सीजफायर के दौरान होर्मुज स्ट्रेट को नहीं खोला जाएगा, जिससे तेल और एलपीजी की आपूर्ति संकटपूर्ण बनी रहेगी।
दोनों देश प्रस्ताव का कर रहे हैं मूल्यांकन
अमेरिका और ईरान ने अभी इस प्रस्तावित एग्रीमेंट को गंभीरता से समीक्षा कर रहे हैं। अमेरिकी मीडिया और पाकिस्तान के सूत्रों के अनुसार दोनों पक्षों ने ड्राफ्ट के हर बिंदु पर ध्यान दिया है। हालांकि, ईरान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि अस्थायी युद्धविराम होता है, तब भी होर्मुज स्ट्रेट नहीं खोला जाएगा। इसका मतलब यह है कि मध्य-पूर्व और एशिया में तेल की कीमतें अभी भी उच्च बनी रहेंगी। वहीं अमेरिका को यह योजना वैश्विक ऊर्जा संकट को नियंत्रित करने और मध्य-पूर्व में अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने में मदद करेगी।
15 से 20 दिन में हो सकता है फाइनल एग्रीमेंट
सूत्रों के अनुसार प्रस्तावित डील का फाइनल एग्रीमेंट अगले 15 से 20 दिनों में तैयार हो सकता है। यदि इसे दोनों पक्षों द्वारा मंजूरी मिल जाती है, तो अमेरिका-ईरान युद्ध का खतरा कम हो जाएगा। इसके अलावा, होर्मुज स्ट्रेट के भविष्य पर भी असर पड़ेगा, क्योंकि स्थायी समझौते के बिना इसे पूरी तरह से खोला नहीं जा सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह एग्रीमेंट सिर्फ युद्धविराम तक सीमित नहीं होगा, बल्कि भविष्य में मध्य-पूर्व में शांति कायम करने में भी मदद करेगा। भारत सहित कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है, क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट से तेल और गैस की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
Read More-हार के गम से जीत की खुशी तक: संजीव गोयनका और ऋषभ पंत की वायरल हुई दिल छू लेने वाली बातचीत
