Iran vs USA: मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच Iran ने बड़ा कूटनीतिक कदम उठाते हुए अमेरिका के 15 बिंदुओं वाले प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। इसके जवाब में ईरान ने 10 सूत्रीय नई योजना पेश की है, जिसका उद्देश्य केवल अस्थायी युद्धविराम नहीं बल्कि स्थायी शांति स्थापित करना बताया जा रहा है। ईरान का कहना है कि अमेरिका का प्रस्ताव जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाता और उसमें कई बातें बढ़ा-चढ़ाकर पेश की गई हैं। ऐसे में तेहरान ने अपनी शर्तों के साथ एक नया रोडमैप सामने रखा है, जिसमें पूरे क्षेत्र में संघर्ष खत्म करने की बात कही गई है। इस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।
10 सूत्रीय प्लान में क्या हैं ईरान की बड़ी मांगें
ईरान की इस नई योजना में कई अहम बिंदु शामिल हैं, जो सीधे तौर पर क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीति को प्रभावित कर सकते हैं। इसमें सबसे बड़ी मांग है कि युद्ध को केवल कुछ समय के लिए रोकने के बजाय पूरी तरह समाप्त किया जाए। इसके साथ ही Strait of Hormuz में सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने के लिए एक नई व्यवस्था बनाने की बात कही गई है। ईरान ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह परमाणु अप्रसार संधि के तहत यूरेनियम संवर्धन के अपने अधिकार की औपचारिक मान्यता चाहता है। इसके अलावा, अमेरिका और उसके सहयोगी देशों द्वारा लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने की मांग भी शामिल है। योजना में यह भी कहा गया है कि यदि उसकी शर्तें मानी जाती हैं तो वह होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी नाकाबंदी हटाने को तैयार है, लेकिन इसके बदले वहां से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाया जाएगा, जिसे पुनर्निर्माण कार्यों में खर्च किया जाएगा।
ट्रंप का सख्त रुख, बढ़ा तनाव
ईरान के इस प्रस्ताव पर Donald Trump की प्रतिक्रिया भी सामने आई है, जिसने हालात को और गंभीर बना दिया है। ट्रंप ने कहा कि युद्धविराम की दिशा में यह एक कदम जरूर है, लेकिन इससे संघर्ष पूरी तरह खत्म नहीं होगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर कोई ठोस समझौता नहीं होता है तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई के लिए तैयार है। ट्रंप ने यहां तक कहा कि ईरान को “एक ही रात में तबाह” किया जा सकता है और अमेरिकी सेना उसके अहम ढांचे जैसे बिजली संयंत्र और पुलों को निशाना बना सकती है। इस बयान के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है और दुनिया की नजरें अब इस टकराव पर टिकी हुई हैं।
शांति की शर्तें या नई रणनीति?
ईरान ने अपनी योजना में कुछ स्पष्ट शर्तें भी रखी हैं, जिनमें अमेरिका और इजरायल के हमलों को तुरंत रोकना, भविष्य में ऐसे हमलों को रोकने के लिए ठोस व्यवस्था बनाना और युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई करना शामिल है। साथ ही, पूरे पश्चिम एशिया में संघर्ष को खत्म करने की बात भी कही गई है। विश्लेषकों का मानना है कि यह योजना केवल शांति प्रस्ताव नहीं बल्कि एक रणनीतिक कदम भी हो सकता है, जिसके जरिए ईरान अपनी स्थिति मजबूत करना चाहता है। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अहम समुद्री मार्ग पर नियंत्रण और शुल्क लगाने की बात वैश्विक व्यापार को प्रभावित कर सकती है। अब देखना होगा कि अमेरिका इस प्रस्ताव पर क्या अंतिम रुख अपनाता है और क्या दोनों देशों के बीच बढ़ता तनाव किसी समझौते तक पहुंच पाता है या नहीं।
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