उत्तर प्रदेश सरकार महिलाओं की सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए एक बड़े और दूरगामी प्लान पर काम कर रही है। अब सिर्फ बड़े नगर निगम ही नहीं, बल्कि प्रदेश के 200 छोटे शहर भी ‘सेफ सिटी’ के रूप में विकसित किए जाएंगे। ये सभी शहर नगर पालिका परिषद के अंतर्गत आते हैं, जहां रोजमर्रा की जरूरतों के लिए महिलाएं घर से बाहर निकलती हैं। सरकार का मानना है कि जब तक छोटे शहरों में सुरक्षित माहौल नहीं बनेगा, तब तक महिलाओं को पूरी आज़ादी और आत्मविश्वास नहीं मिल सकता। इसी सोच के साथ योगी सरकार ने सेफ सिटी प्रोजेक्ट के दूसरे चरण को मंजूरी दे दी है। पहले चरण में स्मार्ट सिटी योजना के तहत 17 नगर निगमों को सेफ सिटी बनाया जा चुका है, जहां निगरानी तंत्र और सुविधाओं का असर साफ नजर आया है। अब उसी मॉडल को छोटे शहरों में लागू किया जाएगा, ताकि प्रदेश की हर महिला खुद को सुरक्षित महसूस कर सके और बिना डर के अपने काम कर सके।
सीसीटीवी कैमरे और पिंक टॉयलेट से बदलेगा शहरों का चेहरा
सेफ सिटी योजना के तहत छोटे शहरों में सबसे बड़ा फोकस निगरानी और मूलभूत सुविधाओं पर रहेगा। योजना के अनुसार, शहरों के प्रमुख चौराहों, बाजारों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन के आसपास, स्कूल-कॉलेज के इलाकों और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर बड़ी संख्या में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। ये कैमरे सीधे कमांड कंट्रोल रूम से जुड़े होंगे, जिससे हर गतिविधि पर नजर रखी जा सकेगी। इसके साथ ही महिलाओं की सुविधा और सम्मान को ध्यान में रखते हुए पिंक टॉयलेट्स का निर्माण कराया जाएगा। छोटे शहरों में अब तक सार्वजनिक शौचालयों की कमी महिलाओं के लिए बड़ी समस्या रही है। पिंक टॉयलेट्स के आने से महिलाओं को सुरक्षित, साफ और सुविधाजनक विकल्प मिलेगा। सरकार का उद्देश्य है कि महिलाएं किसी भी सार्वजनिक स्थान पर खुद को असहज या असुरक्षित न महसूस करें और उनकी दैनिक जिंदगी आसान बने।
नए बजट से मिलेगी रफ्तार, सर्वे के बाद होगा काम शुरू
इस महत्वाकांक्षी योजना को जमीन पर उतारने के लिए प्रदेश सरकार नए बजट में विशेष प्रावधान करने जा रही है। बजट पास होने के बाद सबसे पहले हर नगर पालिका परिषद क्षेत्र में सर्वे कराया जाएगा। इस सर्वे में यह तय किया जाएगा कि किस शहर में कितने सीसीटीवी कैमरों की जरूरत है, कहां पिंक टॉयलेट बनाए जाने चाहिए और किन इलाकों में अतिरिक्त रोशनी की आवश्यकता है। इसके आधार पर संबंधित नगर पालिकाओं से विस्तृत प्रस्ताव मांगे जाएंगे। सरकार चाहती है कि हर शहर की जरूरत के हिसाब से योजना लागू हो, न कि एक ही ढांचे को सभी जगह थोप दिया जाए। इस प्रक्रिया से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सरकारी धन का सही उपयोग हो और महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जरूरत को पूरा किया जा सके।
स्ट्रीट लाइट, हाईमास्ट और 24×7 निगरानी से मिलेगा भरोसा
सेफ सिटी योजना का एक अहम हिस्सा शहरों में बेहतर रोशनी की व्यवस्था करना भी है। कई छोटे शहरों में रात के समय अंधेरे के कारण महिलाएं बाहर निकलने से कतराती हैं। इसे ध्यान में रखते हुए स्ट्रीट लाइटों के साथ-साथ जरूरत के अनुसार हाईमास्ट लाइटें भी लगाई जाएंगी। इससे सड़कें, चौराहे और सार्वजनिक स्थान रात में भी रोशन रहेंगे। रोशनी और सीसीटीवी की संयुक्त व्यवस्था अपराध पर रोक लगाने में कारगर साबित होगी। कमांड कंट्रोल रूम से जुड़े कैमरों की मदद से पुलिस और प्रशासन तुरंत कार्रवाई कर सकेंगे। सरकार का दावा है कि इस योजना के लागू होने के बाद न सिर्फ महिलाओं के खिलाफ अपराधों में कमी आएगी, बल्कि छोटे शहरों में भी सुरक्षित और सकारात्मक माहौल बनेगा। यह पहल महिलाओं के आत्मविश्वास को बढ़ाएगी और उन्हें समाज की मुख्यधारा में और मजबूती से आगे बढ़ने का अवसर देगी।
Read more-पहली बार कैमरे में दिखा अमेज़न का रहस्यमयी कबीला, वीडियो देखकर लोग डर गए