भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक नई रिपोर्ट ने चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के अनुसार, देश के रणनीतिक कच्चे तेल (Strategic Petroleum Reserve) का भंडार फिलहाल इतना है कि उससे केवल करीब 5 दिनों की जरूरत पूरी की जा सकती है। अगर भविष्य में किसी बड़े युद्ध, प्राकृतिक आपदा या वैश्विक संकट की वजह से कच्चे तेल की सप्लाई अचानक रुक जाती है, तो भारत के सामने मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि देश में तुरंत पेट्रोल-डीजल की कमी होने वाली है। भारत लगातार कई देशों से तेल आयात कर रहा है और सामान्य परिस्थितियों में सप्लाई जारी रहती है। फिर भी विशेषज्ञ मानते हैं कि रणनीतिक भंडार बढ़ाना समय की जरूरत है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में देश सुरक्षित रह सके।
दुनिया के कई देशों से खरीदता है भारत तेल
भारत अपनी जरूरत का लगभग 80 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। देश एक या दो नहीं, बल्कि 40 से ज्यादा देशों से तेल आयात करता है। यही वजह है कि किसी एक देश में संकट आने पर भारत दूसरे देशों से आपूर्ति का इंतजाम करने की कोशिश करता है। पिछले कुछ वर्षों में पश्चिम एशिया में तनाव और रूस-यूक्रेन युद्ध के बावजूद भारत ने तेल की सप्लाई बनाए रखी। सरकार ने अलग-अलग देशों के साथ समझौते कर ऊर्जा आपूर्ति को जारी रखा, जिससे आम लोगों को किसी बड़े ईंधन संकट का सामना नहीं करना पड़ा। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि आयात पर इतनी ज्यादा निर्भरता भविष्य में जोखिम भी पैदा कर सकती है।
दूसरे देशों के मुकाबले भारत का रिजर्व काफी कम
रिपोर्ट में भारत के रणनीतिक तेल भंडार की तुलना दूसरे देशों से भी की गई है। बताया गया है कि चीन के पास करीब 92 दिनों की जरूरत पूरी करने लायक कच्चा तेल मौजूद है। जापान के पास लगभग 77 दिनों और दक्षिण कोरिया के पास करीब 31 दिनों का तेल भंडार है। इसके मुकाबले भारत का रणनीतिक रिजर्व काफी छोटा माना जा रहा है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि तेजी से बढ़ती आबादी और बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए भारत को अपने तेल भंडार की क्षमता बढ़ानी होगी। इससे भविष्य में किसी भी वैश्विक संकट के दौरान देश को राहत मिल सकती है और ईंधन की उपलब्धता बनी रह सकती है।
रूस बना भारत का सबसे बड़ा सहारा
रूस इस समय भारत के लिए कच्चे तेल का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है। रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत ने रूस से बड़ी मात्रा में तेल खरीदना शुरू किया। ताजा आंकड़ों के अनुसार, जून महीने में भारत ने हर दिन करीब 25 लाख बैरल कच्चा तेल रूस से आयात किया, जो देश के कुल आयात का आधे से ज्यादा हिस्सा है। यही कारण है कि रूस फिलहाल भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभा रहा है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि केवल एक या दो देशों पर निर्भर रहने के बजाय भारत को ऊर्जा के नए स्रोत विकसित करने, रणनीतिक भंडार बढ़ाने और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में भी तेजी से काम करना होगा। इससे भविष्य में किसी भी अंतरराष्ट्रीय संकट का असर देश पर कम पड़ेगा।
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