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‘अराघची इस्तीफा दो…’ अमेरिका से महासमझौते की भनक लगते ही ईरान में बवाल, बंद कमरे की इस शर्त ने देश को किया आगबबूला!

ईरान में अमेरिका के साथ होने वाली सीक्रेट पीस डील को लेकर भारी बवाल मच गया है। एक इंटरव्यू के बाद भड़के लोग सड़कों पर उतर आए हैं

अमेरिका

ईरान और अमेरिका के बीच पर्दे के पीछे पक रही ‘शांति समझौते’ की खिचड़ी अब सार्वजनिक हो चुकी है, और इसके साथ ही ईरान के भीतर एक बड़ा राजनीतिक ज्वालामुखी फट पड़ा है। इस पूरे विवाद की चिंगारी ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के एक टेलीविजन इंटरव्यू से सुलगी। अराघची ने सरकारी टीवी पर यह स्वीकार कर लिया कि अमेरिका के साथ प्रस्तावित समझौते में होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को लेकर कुछ ऐसी शर्तें हैं, जो ईरान के पारंपरिक रुख को बदल सकती हैं। उन्होंने जैसे ही कहा कि ‘होर्मुज स्ट्रेट का प्रशासन अब पहले जैसा नहीं रहेगा’, वैसे ही देश के कट्टरपंथी गुटों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। इस बयान को ईरान की संप्रभुता और सामरिक ताकत से समझौते के रूप में देखा जा रहा है, जिसके बाद से ही सरकार बैकफुट पर नजर आ रही है।

सड़कों पर उतरा आक्रोश: ‘अराघची इस्तीफा दो’ के नारों से गूंजा ईरान

इस संभावित समझौते की खबर फैलते ही ईरान के उत्तर-पूर्वी शहर मशहद में लोग सड़कों पर उतर आए। विदेश मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय के बाहर दर्जनों प्रदर्शनकारियों ने उग्र प्रदर्शन किया। फार्स न्यूज एजेंसी द्वारा जारी किए गए वीडियो फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि काले चादर पहने महिलाएं लाल और काले झंडे लहराते हुए विदेश मंत्री के खिलाफ नारेबाजी कर रही हैं। प्रदर्शनकारियों के हाथों में तख्तियां थीं, जिन पर ‘अराघची इस्तीफा दो’ और ‘बेइज्जती कराने वाले अराघची मुर्दाबाद’ जैसे तीखे नारे लिखे थे। प्रदर्शनकारियों का साफ आरोप है कि सरकार ने अमेरिका के आर्थिक और नौसैनिक दबाव के आगे घुटने टेक दिए हैं और देश के रणनीतिक हितों को दांव पर लगा दिया है। मशहद के अलावा अब राजधानी तेहरान में भी विदेश मंत्रालय के मुख्यालय के बाहर भारी भीड़ जुटने की अपुष्ट खबरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।

होर्मुज स्ट्रेट पर दांव: क्यों इस शांति डील को ईरान का ‘आत्मसमर्पण’ मान रहे हैं कट्टरपंथी?

ईरान के भीतर इस समझौते का विरोध कर रहे कट्टरपंथी गुटों का मानना है कि यह डील तेहरान की सबसे बड़ी ताकत को कमजोर कर देगी। दरअसल, होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का वह सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ता है, जहां से वैश्विक तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। इस पर ईरान का दबदबा उसकी सबसे बड़ी सैन्य और कूटनीतिक ढाल रहा है। विदेश मंत्री अराघची ने खुलासा किया कि समझौते के तहत अमेरिका अपनी उस नौसैनिक नाकेबंदी को हटाने पर सहमत हुआ है, जो उसने ईरान की हरकतों के जवाब में लगाई थी। लेकिन इसके बदले ईरान को होर्मुज स्ट्रेट में अपनी कुछ रणनीतिक रियायतें देनी पड़ेंगी। आलोचकों और प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह रियायत सीधे तौर पर ईरान की सैन्य ताकत को पंगु बनाने जैसी है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।

ट्रंप का दावा बनाम ईरान की हिचकिचाहट: कब और कैसे होगी इस महाडील पर दस्तखत?

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सस्पेंस इस समझौते की टाइमलाइन को लेकर बना हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तानी अधिकारियों की तरफ से यह दावा किया जा रहा है कि इस शांति समझौते का ड्राफ्ट पूरी तरह तैयार है और रविवार तक इस पर दोनों देशों के डिजिटल यानी इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर हो सकते हैं। इसके लिए एक वर्चुअल समारोह की तैयारियां भी की जा रही हैं। दूसरी तरफ, घरेलू मोर्चे पर घिरी ईरान सरकार इस जल्दबाजी से बचती दिख रही है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने अमेरिकी दावों पर पानी फेरते हुए स्पष्ट किया है कि यह समझौता इतनी जल्दी या ‘कल’ नहीं होने जा रहा है। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि बातचीत अंतिम दौर में है और आने वाले कुछ दिनों के भीतर इस पर अंतिम मुहर लग सकती है। अब देखना यह है कि जनता के भारी विरोध के बीच ईरान सरकार इस समझौते पर आगे बढ़ती है या कदम पीछे खींचती है।

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