जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनकी अलग रह रही पत्नी पायल अब्दुल्ला ने अपनी शादी को कानूनी रूप से खत्म करने के लिए देश के सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया है। लंबे समय से चले आ रहे इस वैवाहिक विवाद में अब एक नया और बड़ा मोड़ आया है, जहां दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से अपने रास्ते हमेशा के लिए अलग करने का फैसला किया है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों ने सुप्रीम कोर्ट में एक संयुक्त याचिका दाखिल की है, जिसमें विवाह को औपचारिक रूप से समाप्त करने की गुहार लगाई गई है।
कपिल सिब्बल का बयान: दोनों चाहते हैं ‘आजादी’
सुनवाई के दौरान इस हाई-प्रोफाइल मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत का ध्यान खींचते हुए एक बड़ा बयान दिया। उन्होंने अदालत को स्पष्ट रूप से बताया कि उमर अब्दुल्ला और पायल अब्दुल्ला दोनों ही अब इस रिश्ते से पूरी तरह मुक्त होना चाहते हैं और अपनी जिंदगी में ‘आजादी’ की तलाश में हैं। दोनों पक्षों के बीच आपसी मामलों पर एक सकारात्मक समझौता हो चुका है, जिसके बाद अब वे बिना किसी कड़वाहट के अपने वैवाहिक बंधन को कानूनी तौर पर समाप्त करना चाहते हैं।
संविधान के अनुच्छेद 142 का विशेष सहारा
इस तलाक की प्रक्रिया को बिना किसी लंबी कानूनी अड़चन के पूरा करने के लिए भारतीय संविधान के एक खास अनुच्छेद का सहारा लिया गया है। वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत मिली विशेष शक्तियों का उपयोग करते हुए इस मामले में तुरंत तलाक की डिक्री जारी की जाए। अनुच्छेद 142 अदालत को पूर्ण न्याय करने का असाधारण अधिकार देता है, जिससे ऐसे मामलों में बिना निचली अदालतों के लंबे चक्कर काटे सीधे तौर पर राहत मिल सकती है।
लंबे समय से अलग रह रहा था यह राजनीतिक परिवार
गौरतलब है कि उमर अब्दुल्ला और पायल अब्दुल्ला लंबे समय से एक-दूसरे से अलग रह रहे थे और उनका यह निजी विवाद कई सालों से चर्चा का विषय बना हुआ था। हालांकि, अब दोनों ने परिपक्वता दिखाते हुए आपसी समझौते का रास्ता चुना है ताकि कानूनी लड़ाई को खत्म किया जा सके। इस कदम से न केवल दोनों को व्यक्तिगत स्तर पर राहत मिलेगी, बल्कि यह लंबे समय से मीडिया की सुर्खियों में बने इस व्यक्तिगत प्रकरण का एक शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण अंत भी साबित होगा।
