दिल्ली के जंतर-मंतर पर इन दिनों एक अलग ही तरह का विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहा है, जहां प्रदर्शनकारियों के बीच सेवा दे रहे एक आम वॉलंटियर की जिंदगी अचानक सुर्खियों और विवादों के घेरे में आ गई है। मिली जानकारी के अनुसार, जंतर-मंतर पर धरने पर बैठे लोगों को पिछले कई दिनों से लगातार खाना और पानी मुहैया कराने वाले मोहम्मद जुनैद के घर उत्तर प्रदेश पुलिस ने अचानक छापा मारा है। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस पर गंभीर आरोप लगे हैं कि उन्होंने न सिर्फ जुनैद के बुजुर्ग पिता और नाबालिग भाई को जबरन हिरासत में ले लिया, बल्कि मेरठ में रहने वाली उनकी बहन के घर पर भी दबिश देकर उनके ससुर और देवर को भी उठा लिया है। इस घटना के बाद से राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर हलचल तेज हो गई है, और हर कोई यह जानने की कोशिश कर रहा है कि आखिर सिर्फ सेवा करने वाले एक युवक के परिवार को इस तरह क्यों निशाना बनाया जा रहा है।
पुलिस पर परिवार को परेशान करने और दस्तावेज जब्त करने के गंभीर आरोप
इस पूरे मामले पर खुद वॉलंटियर मोहम्मद जुनैद ने सामने आकर अपनी दर्द भरी दास्तान बयां की है। जुनैद का कहना है कि शाम के वक्त अचानक उनके घर पर पुलिस की टीम आ धमकी और उनके पिता को अपने साथ ले गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मेरठ में उनकी बहन के घर पुलिस ने तांडव मचाते हुए उनके ससुर और देवर को भी हिरासत में ले लिया है। जुनैद का दावा है कि पुलिस ने कार्रवाई के दौरान उनके घर में रखे सभी बैंक पासबुक और पहचान पत्र भी अपने कब्जे में ले लिए हैं। उनका आरोप है कि पुलिस अधिकारियों का साफ तौर पर कहना है कि जब तक मोहम्मद जुनैद खुद पुलिस के सामने सरेंडर नहीं करते या उन्हें लाकर नहीं सौंपा जाता, तब तक उनके परिवार को राहत नहीं दी जाएगी। जुनैद का सवाल है कि उनकी एकमात्र गलती सिर्फ यह है कि वे जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण तरीके से लोगों को भूखा नहीं रहने दे रहे और उनकी सेवा कर रहे हैं, तो इसके लिए उनके पूरे परिवार को क्यों सजा दी जा रही है।
राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की तीखी प्रतिक्रिया, CJP का कड़ा रुख
इस पूरी घटना के सामने आने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और अन्य छात्र संगठनों ने उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। CJP की तरफ से जारी आधिकारिक प्रतिक्रिया में कहा गया है कि अपराधियों को पकड़ने और कानून व्यवस्था संभालने के बजाय यूपी पुलिस अपना कीमती समय एक साधारण वॉलंटियर को परेशान करने में बर्बाद कर रही है। पार्टी ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि वे इस मुश्किल वक्त में जुनैद और उनके परिवार के साथ चट्टान की तरह खड़े हैं और उन्हें किसी भी कीमत पर अकेला या पीड़ित नहीं होने दिया जाएगा। इसके अलावा, जेएनयू की छात्र नेता दानिश अली समेत कई अन्य प्रमुख हस्तियों ने भी इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। उनका कहना है कि मौजूदा सरकार असहमति की हर आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है, लेकिन वे इस तरह की कायरतापूर्ण हरकतों से डरने वाले नहीं हैं और पुलिस की हर एक गैरकानूनी कार्रवाई को देश की अदालतों में कानूनी रूप से चुनौती दी जाएगी।
20 जून से जारी है सेवा, भविष्य के सवालों के बीच अनिश्चितता का माहौल
गौरतलब है कि जंतर-मंतर पर चल रहा यह विरोध प्रदर्शन बीती 20 जून से शुरू हुआ था और तभी से मोहम्मद जुनैद अपनी मर्जी से वहां मौजूद लोगों के लिए भोजन और पेयजल की व्यवस्था में जुटे हुए थे। जुनैद का यह मानना था कि यदि देश के युवाओं को इस तरह से अंधकार और समस्याओं के बीच धकेला जाएगा, तो आने वाले समय में देश का भविष्य क्या होगा, यही सोचकर वे वहां सेवा दे रहे थे। लेकिन अब इस मानवीय सेवा के बदले उनके पूरे परिवार को पुलिसिया कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है, जिसने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ जहां पुलिस प्रशासन की अपनी दलीलें और जांच का दायरा हो सकता है, वहीं दूसरी طرف मानवाधिकारों और लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन का यह मामला तूल पकड़ता जा रहा है। फिलहाल, इस हाई-प्रोफाइल और संवेदनशील मामले में आगे क्या कानूनी कदम उठाए जाएंगे और जुनैद के परिजनों की रिहाई कब तक हो पाएगी, इस पर पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं।
