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कभी सब्जियां बेचीं, कभी ई-रिक्शा चलाया… आखिर कैसे इस खिलाड़ी ने कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का पहला मेडल जीतकर रच दिया इतिहास?

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने भारत के लिए पहला पदक जीतकर इतिहास रच दिया। जानिए कैसे सब्जियां बेचने और ई-रिक्शा चलाने वाले इस खिलाड़ी ने संघर्षों को हराकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन किया।

Jhandu Kumar

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए पहला पदक जीतने वाले पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार (Jhandu Kumar) आज पूरे देश के लिए प्रेरणा बन गए हैं। ग्लासगो में आयोजित खेलों के दूसरे दिन उन्होंने पुरुषों की हैवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया। यह केवल भारत का पहला पदक ही नहीं, बल्कि झंडू कुमार के अंतरराष्ट्रीय करियर का भी पहला मेडल है। उनकी इस उपलब्धि ने साबित कर दिया कि मजबूत इरादों के सामने मुश्किलें ज्यादा देर तक टिक नहीं पातीं। साधारण परिवार से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने का उनका सफर लाखों युवाओं के लिए एक मिसाल बन गया है।

आर्थिक तंगी के बावजूद नहीं छोड़ा सपना

झंडू कुमार का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। वह एक किसान परिवार से आते हैं, जहां आर्थिक स्थिति हमेशा मजबूत नहीं रही। परिवार की जिम्मेदारियां निभाने के लिए उन्होंने कई छोटे-बड़े काम किए। कभी बाजार में सब्जियां बेचकर घर का खर्च चलाया तो कभी ई-रिक्शा चलाकर परिवार की मदद की। इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने खेल से दूरी नहीं बनाई। दिनभर मेहनत करने के बाद भी वह नियमित अभ्यास करते रहे और खुद को बेहतर बनाने में जुटे रहे। कई बार संसाधनों की कमी आई, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उनकी मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास ने आखिरकार उन्हें उस मुकाम तक पहुंचा दिया, जहां आज पूरा देश उनकी सफलता का जश्न मना रहा है।

 दमदार प्रदर्शन से जीता कांस्य पदक

कॉमनवेल्थ गेम्स की पैरा पावरलिफ्टिंग प्रतियोगिता में झंडू कुमार ने बेहतरीन प्रदर्शन किया। उन्होंने 181 किलोग्राम और 190 किलोग्राम के सफल लिफ्ट पूरे किए, जिससे उन्हें कुल 130.9 अंक मिले। उनका अंतिम 196 किलोग्राम का प्रयास सफल नहीं हो सका, लेकिन शुरुआती शानदार प्रदर्शन की बदौलत उन्होंने कांस्य पदक अपने नाम कर लिया। इस मुकाबले में नाइजीरिया के खिलाड़ी इदरीस रिलुवान ने स्वर्ण पदक जीता, जबकि मैथ्यू हार्डिंग ने रजत पदक हासिल किया। भारत के लिए यह पदक बेहद खास माना जा रहा है क्योंकि इससे देश का कॉमनवेल्थ गेम्स अभियान शानदार शुरुआत के साथ आगे बढ़ा है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि झंडू की यह सफलता आने वाले खिलाड़ियों के लिए नई प्रेरणा बनेगी।

अन्य खिलाड़ियों ने भी दिखाया दम, लेकिन पदक से चूके

भारत के अन्य पैरा खिलाड़ियों ने भी अच्छा प्रदर्शन किया, हालांकि वे पदक जीतने से थोड़ा पीछे रह गए। पुरुषों की लाइटवेट पैरा पावरलिफ्टिंग स्पर्धा में अशोक मलिक ने 143.8 अंक हासिल किए, लेकिन वह चौथे स्थान पर रहे और पदक से चूक गए। वहीं परमजीत कुमार ने अपनी स्पर्धा में सातवां स्थान प्राप्त किया। दूसरी ओर पैरा स्विमिंग की पुरुषों की 100 मीटर फ्रीस्टाइल S13 स्पर्धा में कार्तिक बुडिगिना ने फाइनल तक पहुंचकर चौथा स्थान हासिल किया। भले ही ये खिलाड़ी पदक नहीं जीत पाए, लेकिन उनके प्रदर्शन ने यह संकेत दिया कि भारतीय पैरा खिलाड़ी लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। अब पूरे देश की उम्मीद है कि आने वाले मुकाबलों में भारतीय खिलाड़ी और अधिक पदक जीतकर देश का नाम रोशन करेंगे।

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