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‘अमेरिका के इशारे पर हुआ था तख्तापलट…, शेख हसीना के बेटे के इस बड़े खुलासे से दुनिया में मचा हड़कंप!

जानिए क्यों शेख हसीना के बेटे साजीब वाजेद जॉय ने 2024 के बांग्लादेश तख्तापलट के लिए अमेरिका और बाइडेन प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है।

शेख हसीना

बांग्लादेश की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है। देश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के बेटे साजीब वाजेद जॉय ने साल 2024 में हुए तख्तापलट को लेकर एक ऐसा सनसनीखेज दावा किया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल पैदा कर दी है। वॉशिंगटन में ‘सेंटर फॉर यूएस-बांग्लादेश रिलेशंस’ द्वारा आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जॉय ने खुलकर आरोप लगाया कि उनकी मां की सरकार को गिराने के पीछे सीधे तौर पर अमेरिका का हाथ था। उनके मुताबिक, तत्कालीन बाइडेन प्रशासन ने इस पूरी साजिश में गहरी रुचि ली और हसीना सरकार को हटाने के लिए जमीन तैयार की। जॉय का दावा है कि इस पूरे सत्ता परिवर्तन के खेल में अमेरिकी एजेंसियों और फंड का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया, जिससे बांग्लादेश के आंतरिक राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गए।

यूएसएआईडी और फंडिंग को लेकर किए गए चौंकाने वाले खुलासे

अपने तीखे बयानों में साजीब वाजेद जॉय ने दावा किया कि ‘यूएस एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट’ (यूएसएआईडी) और लोकतंत्र के नाम पर काम करने वाले कुछ संगठनों ने विरोध प्रदर्शनों की आड़ में समूहों को संगठित करने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे अभियान के लिए अमेरिका की तरफ से करीब 50 मिलियन डॉलर की फंडिंग मुहैया कराई गई थी। इसके अलावा, जॉय ने ‘नेशनल डेमोक्रेटिक इंस्टीट्यूट’ और ‘इंटरनेशनल रिपब्लिकन इंस्टीट्यूट’ का नाम लेते हुए कहा कि इन्होंने उन उपद्रवी समूहों को ट्रेनिंग दी जो बाद में हिंसा और अशांति का हिस्सा बने। हालांकि, इन गंभीर और सनसनीखेज आरोपों के समर्थन में जॉय की तरफ से कोई भी ठोस दस्तावेजी सबूत पेश नहीं किया गया है, जिससे इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

मुहम्मद यूनुस की ताजपोशी और क्षेत्रीय सुरक्षा पर बड़ा सवालिया निशान

शेख हसीना के बेटे ने अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस के सत्ता में आने को लेकर भी बड़ा दावा किया है। उनका कहना है कि अमेरिकी सैन्य दबाव और ढाका में तैनात अमेरिकी राजदूत के प्रभाव के कारण ही यूनुस को यह कमान सौंपी गई थी। जॉय ने यह भी चेतावनी दी कि मौजूदा व्यवस्था के दौर में देश के भीतर उग्रवादियों और चरमपंथी संगठनों को खुली छूट मिल गई है, जिससे पाकिस्तान से जुड़े आतंकी तत्वों और लश्कर-ए-तैयबा के लोगों की गतिविधियां फिर से बढ़ने लगी हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति केवल बांग्लादेश ही नहीं, बल्कि भारत समेत पूरे दक्षिण एशिया की क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए एक बहुत बड़ा खतरा बन सकती है। इसके साथ ही, उन्होंने मौजूदा प्रशासन पर चीन के साथ सांठगांठ बढ़ाने और चीनी कंपनियों को अवैध रूप से फायदा पहुंचाने के भी गंभीर आरोप लगाए।

आर्थिक समझौतों पर संकट और निवेशकों के घटते भरोसे की चेतावनी

बांग्लादेश की मौजूदा आर्थिक सेहत पर बात करते हुए जॉय ने देश के बड़े व्यावसायिक अनुबंधों की सत्यता पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने अमेरिकी विमान निर्माता कंपनी ‘बोइंग’ के साथ हुए 29 विमानों के बड़े अनुबंध और ऊर्जा समझौतों का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार के पास अपने वित्तीय दायित्वों को पूरा करने के लिए पर्याप्त धन ही नहीं है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी कंपनियों को उनके काम का पूरा भुगतान नहीं मिल रहा है। इस दौरान, हसीना सरकार के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी अहमद कैकाउस ने भी चिंता जताई कि देश में बढ़ती राजनीतिक अस्थिरता और कमजोर होती कानूनी संस्थाएं विदेशी निवेशकों का भरोसा तोड़ रही हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय साझेदारों से अपील की कि वे देश में राजनीतिक दूरियां बढ़ाने के बजाय शांति, संवाद और निष्पक्ष कानूनी प्रक्रिया को बढ़ावा दें ताकि अर्थव्यवस्था को बचाया जा सके।

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