प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (20 अक्टूबर, 2026) को दिल्ली में आयोजित एक भव्य दशहरा कार्यक्रम के दौरान देश को संबोधित करते हुए एक बेहद अहम और कड़ा संदेश दिया है। अपने संबोधन में उन्होंने देश के सामने मौजूद उन तीन बड़ी ताकतों का खुलकर जिक्र किया, जिन्हें देश का सीधा दुश्मन बताया गया है। पीएम मोदी ने कहा कि आज देश को बाहरी चुनौतियों के साथ-साथ भीतर की उन नकारात्मक ताकतों से भी पूरी एकजुटता के साथ निपटने की जरूरत है, जो लगातार राष्ट्र की एकता को कमजोर करने का प्रयास कर रही हैं।
देश के मान-सम्मान और संस्कृति पर चोट करने वाले लोग हैं असली दुश्मन
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट शेयर करते हुए और मंच से अपने संबोधन में देश के तीन मुख्य दुश्मनों की पहचान स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि राष्ट्र के मान-सम्मान को ठेस पहुंचाने वाली ताकतें, समाज को जाति, धर्म या वर्ग के नाम पर बांटने वाले लोग और हमारी प्राचीन संस्कृति से घृणा रखने वाली मानसिकता—ये सभी सीधे तौर पर देश के दुश्मन हैं। पीएम ने जोर देकर कहा कि इन असामाजिक और राष्ट्रविरोधी ताकतों का मुकाबला करने के लिए किसी एक व्यक्ति या दल की नहीं, बल्कि पूरे देश की सामूहिक शक्ति और सजगता की आवश्यकता है।
राजनीतिक दलों और संस्थाओं को राष्ट्रहित में आना होगा एक साथ
अपने संबोधन को आगे बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री ने इस बात पर विशेष बल दिया कि संकट की घड़ी में या देश के विकास के मुद्दों पर हमारे विचार भले ही अलग हों, लेकिन राष्ट्रहित सर्वोपरि होना चाहिए। उन्होंने अपील की कि राष्ट्र की तमाम संस्थाएं और देश के सभी राजनीतिक दल आपसी मतभेदों को दरकिनार कर देश के हित में एक मंच पर आएं। पीएम ने भगवान श्रीराम के आदर्शों का स्मरण करते हुए कहा कि जब लक्ष्य बड़ा हो और चुनौतियां कठिन हों, तो हमें दूसरों का मुंह देखने के बजाय अपने आंतरिक सामर्थ्य, संसाधनों और जनभागीदारी पर भरोसा करना चाहिए।
असंभव को भी संभव बनाती है सामूहिक शक्ति और जनभागीदारी
संकट के समय आत्मनिर्भरता और अडिग संकल्प का महत्व समझाते हुए पीएम मोदी ने कहा कि रास्ते की बाधाएं कभी भी हमारी यात्रा को रोक नहीं सकतीं। लंका दूर थी और सामने विशाल समुद्र जैसी विकट चुनौती थी, लेकिन भगवान श्रीराम ने जनता की सामूहिक शक्ति को जागृत कर असंभव लगने वाले लक्ष्य को भी संभव कर दिखाया था। उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया कि वे अपनी मेहनत और संकल्प को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाएं, क्योंकि यही सफलता का मूलमंत्र है और इसी रास्ते पर चलकर हम देश को और अधिक सशक्त बना सकते हैं।
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