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‘हैप्पी बर्थडे दीदी…’ बहन के बर्थडे से ठीक पहले छात्र ने की खुदकुशी, रैगिंग और अपमान से तंग आकर उठाया खौफनाक कदम

अनूपपुर में 12 साल के छात्र ने बहन के जन्मदिन पर की आत्महत्या। सुसाइड नोट में शिक्षक और दोस्तों द्वारा 'काला कौआ' कहकर चिढ़ाने का खुलासा।

अनूपपुर

मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले से एक ऐसी झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दी हैं और समाज के सामने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले के चचाई थाना क्षेत्र के अमलाई शनिचरी बाजार में एक 12 साल के मासूम छात्र ने अपने घर के अंदर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। जिस दिन घर में बहन के जन्मदिन की खुशियां मनाई जानी थीं और जश्न की तैयारियां चल रही थीं, उसी दिन सुबह इस दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे परिवार को कोहराम में बदल दिया। परिवार के सदस्य समझ ही नहीं पा रहे थे कि आखिर उनके हंसते-खेलते बच्चे ने इतना खौफनाक कदम क्यों उठाया। जब सुबह परिजनों ने उसके कमरे का दरवाजा बंद देखा और खिड़की से झांका, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। आनन-फानन में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस दुखद हादसे के बाद से पूरे इलाके में शोक और सन्नाटे का माहौल है।

सुसाइड नोट में खुला दर्द, ‘काला कौआ’ कहकर चिढ़ाते थे दोस्त और शिक्षक

इस घटना के सबसे बड़े और चौंकाने वाले पहलू का खुलासा तब हुआ जब पुलिस ने मौके की तलाशी ली और वहां से एक सुसाइड नोट बरामद हुआ। इस छोटे से बच्चे द्वारा छोड़े गए सुसाइड नोट के शब्दों ने हर किसी के दिल को झकझोर कर रख दिया। नोट में मासूम ने अपनी बहन को जन्मदिन की बधाई देते हुए लिखा, ‘हैप्पी बर्थडे कोकि दीदी, पापा आई लव यू।’ लेकिन इसके आगे उसने जो लिखा, वह स्कूल और समाज के सिस्टम पर एक बड़ा तमाचा है। बच्चे ने अपने नोट में दर्द बयां करते हुए लिखा कि स्कूल में उसके सहपाठी (दोस्त) और शिक्षक उसे लगातार ‘काला कौआ’ कहकर चिढ़ाते थे और अपमानित करते थे। इस रोज-रोज के मानसिक उत्पीड़न और बेइज्जती से तंग आकर उसने यह खौफनाक रास्ता चुन लिया। यह घटना इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि बच्चों के साथ छोटी-सी रैगिंग या मजाक भी उनके कोमल मन पर कितना गहरा और घातक असर डाल सकता है।

मोबाइल पर खंगाले गए थे फंदे से लटकने के वीडियो, पुलिस हर एंगल से कर रही जांच

प्रारंभिक जांच में यह बात भी सामने आई है कि आत्महत्या करने से पहले इस मासूम ने अपने दादा के मोबाइल फोन का इस्तेमाल किया था। पुलिस की शुरुआती छानबीन में पता चला कि मोबाइल की सर्च हिस्ट्री में फांसी लगाने से जुड़े वीडियो देखे गए थे, जिससे यह अंदेशा लगाया जा रहा है कि बच्चे ने इंटरनेट के जरिए इस कदम को उठाने का तरीका देखा था। घटना की सूचना मिलते ही चचाई थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सुसाइड नोट को मुख्य आधार बनाकर मामले की गहराई से जांच की जा रही है। इसके साथ ही परिवार में किसी प्रकार के घरेलू विवाद या अन्य संभावित कारणों की भी बारीकी से पड़ताल की जा रही है। पुलिस का मानना है कि मोबाइल की डिजिटल फॉरेंसिक जांच और अन्य पहलुओं के सामने आने के बाद ही इस पूरी घटना की असल तस्वीर पूरी तरह साफ हो सकेगी।

स्कूलों में बढ़ती बुलिंग और बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर सवाल

यह दुखद घटना केवल एक बच्चे की मौत नहीं है, बल्कि यह हमारे पूरे सामाजिक और शैक्षणिक तंत्र के लिए एक बड़ी चेतावनी है। आज के समय में स्कूलों में बच्चों के बीच होने वाली आपसी खींचतान, रंग-रूप या नाम को लेकर मजाक उड़ाना (बुलिंग) आम बात बनती जा रही है, जिसे कई बार शिक्षक भी नजरअंदाज कर देते हैं। इस मामले में शिक्षकों द्वारा भी बच्चे को इस तरह चिढ़ाए जाने की बात सामने आना शिक्षण संस्थानों की संवेदनशीलता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है। बच्चों का मन बेहद कोमल होता है और वे स्कूल को दूसरा घर मानते हैं, लेकिन जब शिक्षक और साथी ही उनका मानसिक शोषण करने लगें, तो वे अंदर से टूट जाते हैं। इस घटना ने यह अनिवार्य कर दिया है कि माता-पिता और शिक्षकों को बच्चों के व्यवहार में आ रहे बदलावों पर पैनी नजर रखनी चाहिए। बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने और स्कूलों में काउंसलिंग की व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अब समाज को कड़े कदम उठाने की सख्त जरूरत है।

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