IIT बॉम्बे के हॉस्टल में 20 वर्षीय छात्र साहिल वाकोडे की संदिग्ध मौत के बाद उपजा तनाव आखिरकार प्रशासन और छात्रों के बीच हुए एक बड़े समझौते के बाद थमता नजर आ रहा है। पिछले तीन दिनों से लगातार जारी छात्र विरोध प्रदर्शनों के दबाव में आकर संस्थान के निदेशक प्रोफेसर शिरीष केदारे ने छात्रों की सभी 18 सूत्रीय मांगों को स्वीकार कर लिया है। इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के दौरान कैंपस में 20 सितंबर की देर रात लंबी चर्चा चली, जिसके बाद प्रशासन ने छात्रों के मांगों वाले चार्टर पर आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर कर दिए हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने देश भर के शिक्षण संस्थानों में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और शिक्षकों के रवैये पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जातिसूचक गालियों और मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप
यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब एनर्जी साइंस विभाग के छात्र साहिल वाकोडे का शव 18 सितंबर को उसके हॉस्टल के कमरे में मिला था। संस्थान का दावा था कि साहिल को परीक्षा के दौरान नकल करते पकड़ा गया था और उसके तुरंत बाद यह दुखद घटना हुई। हालांकि, साहिल के पिता रविंद्र वाकोडे ने इन दावों को खारिज करते हुए पवई पुलिस स्टेशन में एक गंभीर एफआईआर दर्ज कराई। पिता का आरोप था कि फैकल्टी टीचर सूर्यनारायण डुल्ला पिछले तीन महीनों से साहिल को लगातार जातिसूचक गालियां दे रहे थे और उसे झूठे मामलों में फंसाने की धमकियां दे रहे थे, जिससे आहत होकर उसने यह कदम उठाया। पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रोफेसर डुल्ला के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने और एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर उन्हें मुख्य आरोपी बनाया है।
प्रोफेसर का निलंबन और छात्रों की 18 सूत्रीय मांगें
छात्रों के कड़े विरोध के आगे झुकते हुए आईआईटी बॉम्बे प्रशासन ने आरोपी प्रोफेसर सूर्यनारायण डुल्ला को 20 सितंबर की शाम को ही उनके पद से निलंबित कर दिया। इसके अलावा, छात्रों के 18 सूत्रीय चार्टर में कई अन्य महत्वपूर्ण सुधारों को भी मंजूरी मिली है। छात्रों ने मांग की है कि संस्थान साहिल के बारे में लिंक्डइन (LinkedIn) पर जारी की गई अधूरी और भ्रामक जानकारी के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगे। साथ ही, इस पूरी घटना की एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए जिसकी अंतरिम रिपोर्ट 30 सितंबर और अंतिम रिपोर्ट 15 अक्टूबर तक सार्वजनिक की जाए। समझौते में प्रोफेसरों के लिए सख्त आचार संहिता, कैंपस अस्पताल में 24 घंटे मनोचिकित्सक की उपलब्धता और प्रशासनिक फैसलों में छात्रों की भागीदारी बढ़ाने जैसी बातें शामिल हैं।
भविष्य की चेतावनी और पारदर्शी जांच की उम्मीद
इस समझौते के बाद अब आगामी ओपन हाउस बैठक में इन सभी फैसलों के आधिकारिक क्रियान्वयन की घोषणा किए जाने की पूरी उम्मीद है। हालांकि, छात्रों ने प्रशासन को एक सख्त चेतावनी भी दी है कि यदि समझौते की तिथि से एक महीने के भीतर सभी वादों को जमीन पर नहीं उतारा गया, तो निदेशक, एसोसिएट डीन और छात्र मामलों के डीन को अपने पदों से इस्तीफा देना होगा। वर्तमान में मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है। इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि उच्च शिक्षण संस्थानों के परिसरों में छात्रों को मानसिक सुरक्षा और संवेदनशीलता प्रदान करने के लिए कितने कड़े और त्वरित सुधारों की आवश्यकता है।
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