पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पार्टी के अंदर चल रहे विवाद के बीच ममता बनर्जी के गुट को अब नई राजनीतिक पहचान के साथ आगे बढ़ना होगा। चुनाव आयोग के फैसले के बाद पुराने पार्टी नाम और चुनाव चिह्न को लेकर स्थिति बदल गई है। ममता गुट को फिलहाल अलग नाम दिया गया है और चुनाव लड़ने के लिए नया प्रतीक भी आवंटित किया गया है। यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब राज्य में आगामी चुनावी गतिविधियां तेज हो रही हैं।
पुराने सिंबल की जगह मिला नया चुनाव चिह्न
ममता बनर्जी की पार्टी लंबे समय से ‘जोड़ा फूल’ चुनाव चिह्न के जरिए चुनाव मैदान में उतरती रही है। यही प्रतीक तृणमूल की पहचान बन चुका था। अब ममता के गुट को ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ वाला नया चुनाव चिह्न मिला है। पार्टी के नाम में भी बदलाव किया गया है। दूसरी तरफ पार्टी के दूसरे गुट को भी अलग नाम और चुनाव चिह्न दिया गया है। इस फैसले के बाद दोनों पक्षों को अलग-अलग पहचान के साथ चुनावी प्रक्रिया में आगे बढ़ना होगा।
विधायक और सांसदों की संख्या में भी बदलाव का दावा
ममता बनर्जी के राजनीतिक खेमे के सामने सिर्फ नाम और सिंबल की चुनौती नहीं है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक कुछ महीनों पहले उनके साथ बड़ी संख्या में विधायक और सांसद थे, लेकिन अब उनकी संख्या घटकर करीब 20 विधायक और 8 सांसद बताई जा रही है। पार्टी के भीतर अलग-अलग नेताओं के गुट बनने की बात भी सामने आई है। इससे संगठन में नेतृत्व और नियंत्रण को लेकर विवाद और गहरा गया है। हालांकि, अलग-अलग गुटों के दावों और आंकड़ों की पुष्टि संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड से अलग-अलग की जानी जरूरी है।
आगे की राह पर टिकी नजरें
पार्टी के भीतर मतभेद बढ़ने के पीछे चुनावी हार, संगठन में नेतृत्व को लेकर खींचतान और कई पुराने नेताओं के अलग होने जैसे कारण बताए जा रहे हैं। ममता बनर्जी का गुट इन घटनाओं को अलग नजरिए से देखता है और राजनीतिक साजिश का आरोप भी लगा चुका है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि नए नाम और नए चुनाव चिह्न के साथ ममता का गुट संगठन को किस तरह आगे बढ़ाता है। आने वाले चुनाव और चुनाव आयोग की आगे की प्रक्रिया से इस विवाद की तस्वीर और साफ हो सकती है।
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