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उड़ान के 10 मिनट बाद ही बिगड़े हालात! पवन हंस हेलिकॉप्टर को समुद्र में उतारना पड़ा, कैसे टला बड़ा हादसा?

अंडमान-निकोबार में पवन हंस का हेलिकॉप्टर उड़ान भरने के कुछ देर बाद तकनीकी खराबी का शिकार हो गया। पायलट ने सूझबूझ दिखाते हुए समुद्र में इमरजेंसी लैंडिंग कराई। सभी सात लोग सुरक्षित हैं। जानिए पूरा घटनाक्रम।

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में मंगलवार सुबह एक बड़ा हादसा उस वक्त टल गया, जब पवन हंस लिमिटेड का एक हेलिकॉप्टर उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद तकनीकी खराबी का शिकार हो गया। यह हेलिकॉप्टर पोर्ट ब्लेयर से मायाबंदर के लिए रवाना हुआ था। जानकारी के मुताबिक सुबह करीब 9:30 बजे हेलिकॉप्टर ने दो क्रू मेंबर और पांच यात्रियों के साथ उड़ान भरी थी।

उड़ान सामान्य थी, लेकिन कुछ ही मिनटों में तकनीकी गड़बड़ी के संकेत मिलने लगे। पायलट ने स्थिति को भांपते हुए तुरंत एहतियाती कदम उठाए। अधिकारियों के अनुसार, हेलिकॉप्टर में कुल सात लोग सवार थे और सभी सुरक्षित हैं। किसी के घायल होने की खबर नहीं है, जिससे राहत की सांस ली जा रही है।

समुद्र में इमरजेंसी लैंडिंग का फैसला

तकनीकी खराबी बढ़ने के बाद पायलट ने हेलिकॉप्टर को सुरक्षित स्थान पर उतारने का निर्णय लिया। चूंकि हेलिकॉप्टर तटीय क्षेत्र के ऊपर था, इसलिए समुद्र में नियंत्रित लैंडिंग का विकल्प चुना गया। अधिकारियों ने बताया कि मायाबंदर में निर्धारित लैंडिंग से पहले, रनवे से लगभग 300 मीटर दूर समुद्र में हेलिकॉप्टर को उतारा गया।

समुद्र में इमरजेंसी लैंडिंग बेहद चुनौतीपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि इसमें संतुलन, ऊंचाई और गति का सटीक नियंत्रण जरूरी होता है। पायलट की सूझबूझ और प्रशिक्षण की वजह से सभी यात्री सुरक्षित बाहर निकाले गए। स्थानीय प्रशासन और रेस्क्यू टीम तुरंत मौके पर पहुंच गई और सभी को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया।

तकनीकी खराबी की जांच शुरू

घटना के बाद हेलिकॉप्टर की तकनीकी जांच शुरू कर दी गई है। प्राथमिक जानकारी के अनुसार उड़ान के दौरान इंजन या हाइड्रोलिक सिस्टम में गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है, हालांकि आधिकारिक रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट कारण सामने आएगा।

एविएशन विशेषज्ञों का कहना है कि द्वीप क्षेत्रों में हेलिकॉप्टर सेवा जीवनरेखा की तरह होती है, इसलिए नियमित रखरखाव और तकनीकी परीक्षण बेहद जरूरी हैं। पवन हंस की सेवाएं अंडमान-निकोबार में लंबे समय से संचालित हो रही हैं और दूरदराज के इलाकों को जोड़ने में अहम भूमिका निभाती हैं।

कंपनी के प्रवक्ता ने कहा है कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और पूरे मामले की विस्तृत जांच की जाएगी। हेलिकॉप्टर को समुद्र से निकालने और तकनीकी विश्लेषण के लिए विशेष टीम तैनात की गई है।

यात्रियों की सुरक्षा और आगे की कार्रवाई

इस घटना ने एक बार फिर हवाई सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े किए हैं, लेकिन राहत की बात यह रही कि किसी भी यात्री को चोट नहीं आई। प्रशासन ने बताया कि सभी सातों लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया और मेडिकल जांच के बाद उन्हें घर भेज दिया गया।

विशेषज्ञों के अनुसार, हेलिकॉप्टर पायलटों को समुद्र में आपातकालीन लैंडिंग के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। ऐसे हालात में घबराहट से बचते हुए त्वरित निर्णय लेना ही सबसे बड़ी चुनौती होती है। इस मामले में पायलट की सतर्कता ने संभावित बड़े हादसे को टाल दिया।

अब जांच रिपोर्ट का इंतजार है, जिससे साफ होगा कि तकनीकी खराबी किस वजह से आई और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल अंडमान में हेलिकॉप्टर सेवा सामान्य रूप से जारी है, लेकिन सुरक्षा मानकों की दोबारा समीक्षा की जा रही है।

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