जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में सुरक्षाबलों को खुफिया एजेंसियों से सूचना मिली थी कि कुछ आतंकी पासरकुट और छतरू इलाके में छिपे हुए हैं। ये वही आतंकी बताए जा रहे थे जो पिछले कई महीनों से सुरक्षा एजेंसियों से बचते फिर रहे थे और इलाके में अपनी मौजूदगी बनाए रखने की कोशिश कर रहे थे। इनपुट मिलते ही भारतीय सेना की वाइट नाइट कोर, 2 पैरा स्पेशल फोर्स, जम्मू-कश्मीर पुलिस की एसओजी और सीआरपीएफ ने संयुक्त अभियान शुरू किया।
ऑपरेशन बेहद संवेदनशील इलाके में चलाया गया, जहां पहाड़ी भूभाग और घने जंगल सुरक्षाबलों के लिए चुनौती बन सकते थे। रणनीति के तहत पूरे क्षेत्र की घेराबंदी की गई और तलाशी अभियान शुरू हुआ। सुरक्षाबलों को शक था कि आतंकी किसी अस्थायी ठिकाने या प्राकृतिक गुफा में छिपे हो सकते हैं। इसी दौरान डॉग स्क्वॉड को भी टीम के साथ लगाया गया ताकि संदिग्ध ठिकानों का सटीक पता लगाया जा सके।
जैसे-जैसे जवान आगे बढ़े, माहौल तनावपूर्ण होता गया। हर कदम सोच-समझकर रखा जा रहा था। टीम को अंदेशा था कि किसी भी समय मुठभेड़ शुरू हो सकती है।
सबसे आगे था टाइसन, पहली गोली उसी ने झेली
संदिग्ध ठिकाने तक पहुंचने की जिम्मेदारी डॉग स्क्वॉड के सदस्य टाइसन को सौंपी गई थी। टाइसन पहले भी कई अभियानों में अपनी सूंघने की क्षमता और बहादुरी का परिचय दे चुका था। इस बार भी वह सबसे आगे चल रहा था और अपने हैंडलर के इशारों पर इलाके को सूंघते हुए आगे बढ़ रहा था।
जैसे ही टीम एक खास बिंदु के करीब पहुंची, अचानक आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी। गोलियों की आवाज से पूरा इलाका गूंज उठा। सुरक्षाबल तुरंत कवर में आए और जवाबी कार्रवाई शुरू की। इसी दौरान सबसे आगे मौजूद टाइसन के पैर में गोली लग गई। गोली लगते ही वह घायल हो गया, लेकिन उसने पीछे हटने से इनकार कर दिया।
अधिकारियों के मुताबिक, घायल होने के बावजूद टाइसन ने अपने हैंडलर का साथ नहीं छोड़ा। वह दर्द में था, लेकिन उसकी ट्रेनिंग और साहस ने उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उसकी मौजूदगी और संकेतों से सुरक्षाबलों को आतंकियों के सटीक ठिकाने का अंदाजा मिला, जिससे ऑपरेशन को निर्णायक मोड़ मिला।
तीन आतंकी ढेर, टॉप जैश कमांडर भी मारा गया
मुठभेड़ कई घंटों तक चली। सुरक्षाबलों ने संयम और रणनीति के साथ जवाबी फायरिंग की। धीरे-धीरे आतंकियों की घेराबंदी मजबूत की गई और उन्हें बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं मिला। अंततः तीन आतंकियों को मार गिराया गया। अधिकारियों के अनुसार, मारे गए आतंकियों में एक टॉप जैश कमांडर भी शामिल था, जो लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर था।
ऑपरेशन के बाद इलाके की दोबारा तलाशी ली गई और हथियार, गोला-बारूद और अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई। यह अभियान सुरक्षा बलों के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है, क्योंकि इससे क्षेत्र में सक्रिय आतंकी नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है।
लेकिन इस सफलता की कहानी में सबसे ज्यादा चर्चा टाइसन की बहादुरी को लेकर हो रही है। घायल होने के बावजूद उसने मिशन को अधूरा नहीं छोड़ा। उसे तुरंत चिकित्सा सहायता दी गई और सेना के पशु चिकित्सकों की निगरानी में उसका इलाज शुरू किया गया। अधिकारियों ने बताया कि टाइसन की हालत अब स्थिर है।
इंसान और उसके सबसे भरोसेमंद साथी की मिसाल
किश्तवाड़ एनकाउंटर ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सुरक्षाबलों के ऑपरेशन में डॉग स्क्वॉड की भूमिका कितनी अहम होती है। ये प्रशिक्षित कुत्ते न केवल विस्फोटक और हथियारों का पता लगाने में मदद करते हैं, बल्कि कठिन भूभाग में छिपे आतंकियों तक पहुंचने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
टाइसन की बहादुरी ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। सोशल मीडिया पर लोग उसकी साहसिक भूमिका की सराहना कर रहे हैं। कई लोगों ने लिखा कि टाइसन ने जवानों की जान बचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे अभियानों में डॉग स्क्वॉड के सदस्य जोखिम उठाते हैं, लेकिन उनकी ट्रेनिंग और वफादारी उन्हें हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार करती है।
यह घटना केवल एक सफल एनकाउंटर की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस अटूट विश्वास और साझेदारी की मिसाल भी है जो इंसान और उसके सबसे भरोसेमंद साथी के बीच होती है। किश्तवाड़ के इस ऑपरेशन में जहां सुरक्षाबलों ने आतंक के खिलाफ बड़ी जीत दर्ज की, वहीं टाइसन की बहादुरी हमेशा याद रखी जाएगी।