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जूते उतारकर नंगे पैर बैठा रहा मुस्लिम शख्स, ‘हनुमान अंश’ देखते हुए वीडियो वायरल, वजह जानकर भावुक हो जाएंगे

‘हनुमान अंश’ फिल्म देखते मुस्लिम शख्स का नंगे पैर बैठने वाला वीडियो वायरल हो रहा है। वहीं मिराज सिनेमा ने बाबा नीम करोली के सम्मान में सीट नंबर 9 रिजर्व की है।

हनुमान अंश

बाबा नीम करोली के जीवन से प्रेरित फिल्म ‘हनुमान अंश’ इन दिनों दर्शकों के बीच चर्चा में है। इसी बीच सिनेमा हॉल से सामने आया एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में सफेद कुर्ता-पायजामा और टोपी पहने एक मुस्लिम शख्स थिएटर में बैठकर फिल्म देखता नजर आ रहा है। खास बात यह है कि उसने अपने जूते उतार रखे हैं और वह नंगे पैर सीट पर बैठा दिखाई दे रहा है। वीडियो देखने के बाद सोशल मीडिया पर कई लोग इसे आस्था, सम्मान और आपसी भाईचारे से जोड़कर देख रहे हैं।

बाबा के सम्मान में दिखा अलग अंदाज

वायरल वीडियो में शख्स फिल्म देखते समय पूरी तरह कहानी में डूबा हुआ नजर आता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बाबा नीम करोली के प्रति सम्मान जताने के लिए उसने जूते उतारकर फिल्म देखने का फैसला किया। इस वीडियो को देखकर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई यूजर्स इसे भारत की साझा संस्कृति और आपसी सद्भाव की तस्वीर बता रहे हैं। सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने लिखा कि ऐसी तस्वीरें धर्म से ऊपर इंसानियत और सम्मान की भावना को सामने लाती हैं। हालांकि, वायरल वीडियो को लेकर सामने आई जानकारी के आधार पर ही इसके संदर्भ को समझा जा रहा है।

मिराज सिनेमा ने सीट नंबर 9 को किया रिजर्व

फिल्म को लेकर दर्शकों की आस्था और उत्साह का एक और उदाहरण सामने आया है। मल्टीप्लेक्स चेन मिराज सिनेमा ने बाबा नीम करोली के सम्मान में अपने थिएटर की एक सीट को खास तौर पर आरक्षित करने की जानकारी दी है। सिनेमा प्रबंधन ने सीट नंबर 9 को बाबा के लिए रिजर्व बताया। इसके पीछे भाव यह है कि बाबा खुद अपने भक्तों के साथ बैठकर फिल्म देख रहे हैं। सिनेमा हॉल की इस पहल की भी सोशल मीडिया पर चर्चा हो रही है और लोग इसे बाबा के प्रति श्रद्धा का प्रतीक बता रहे हैं।

कौन थे नीम करोली बाबा?

नीम करोली बाबा को उनके भक्त महाराज-जी के नाम से भी जानते हैं। उन्हें भगवान हनुमान का अनन्य भक्त और आध्यात्मिक गुरु माना जाता है। उनके जीवन से जुड़े कई किस्से आज भी उनके अनुयायियों के बीच लोकप्रिय हैं। बताया जाता है कि उनका जन्म उत्तर प्रदेश के अकबरपुर गांव में करीब 1900 के आसपास हुआ था। 11 सितंबर 1973 को वृंदावन में उन्होंने देह त्याग दी थी। आज भी देश-विदेश में उनके लाखों अनुयायी हैं। ‘हनुमान अंश’ के जरिए उनके जीवन और आध्यात्मिक व्यक्तित्व को बड़े पर्दे पर दिखाने की कोशिश की गई है।

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