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‘अभी 20 दिन भी नहीं हुए…’ तेल बैन से भड़का ईरान, अमेरिकी हमले के बाद तेहरान ने दी ऐसी चेतावनी जिससे दहल उठी दुनिया!

अमेरिका-ईरान युद्धविराम समझौता 20 दिन में ही टूटा! अमेरिका ने ईरान के तेल निर्यात पर फिर लगाया बैन, भड़के तेहरान ने दी गंभीर चेतावनी।

ईरान

वैश्विक महाशक्तियों के बीच शांति स्थापित करने की कोशिशें एक बार फिर ताश के पत्तों की तरह ढह गई हैं। अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुआ ऐतिहासिक युद्धविराम समझौता अब पूरी तरह से खत्म होने की कगार पर पहुंच गया है। दक्षिणी ईरान के रणनीतिक इलाकों—सिरिक, केशम और बंदर अब्बास—से आ रही भीषण धमाकों की खबरों ने पूरी दुनिया को सन्नाटे में डाल दिया है। बताया जा रहा है कि इन अमेरिकी हमलों में कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिससे क्षेत्र में युद्ध की स्थिति दोबारा पैदा हो गई है। इस बीच, ईरान ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए सीधे तौर पर अमेरिका को चेतावनी दी है कि इस बार जो नतीजे होंगे, उसकी जिम्मेदारी पूरी तरह वॉशिंगटन की होगी।

इस्लामाबाद समझौते की धज्जियां उड़ीं, तेल निर्यात पर दोबारा लगा सख्त बैन

तनाव की मुख्य वजह अमेरिका द्वारा समझौते की शर्तों से अचानक पीछे हटना माना जा रहा है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी कर अमेरिका पर इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) का खुला उल्लंघन करने का संगीन आरोप लगाया है। ईरान का कहना है कि दोनों देशों के बीच हुए युद्धविराम समझौते के तहत ईरानी तेल निर्यात पर लगी पाबंदियों में जो अस्थायी राहत (जनरल लाइसेंस) दी गई थी, अमेरिकी वित्त विभाग ने उसे अचानक वापस ले लिया है। तेहरान के मुताबिक, अमेरिका का यह कदम 18 जून 2026 को हुए समझौते के ‘अनुच्छेद-10’ का सीधा उल्लंघन है, जो उसकी नीयत पर बड़े सवाल खड़े करता है।

‘इतनी जल्दी बदल गया रंग’— वाइट हाउस की साख पर ईरान का करारा हमला

ईरान ने अमेरिका के इस यू-टर्न पर गहरी नाराजगी और हैरानी जताई है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने तंज कसते हुए कहा कि अभी तो इस्लामाबाद समझौते पर दस्तखत हुए 20 दिन भी पूरे नहीं हुए थे, कि अमेरिका ने 3 जुलाई 2026 को जनरल लाइसेंस रद्द करने का एलान कर दिया। ईरान ने वैश्विक मंच पर अमेरिका को घेरते हुए कहा कि यह अमेरिकी प्रशासन की बुरी नीयत, अस्थिर विदेश नीति और उसके अविश्वसनीय रवैये का सबसे बड़ा प्रमाण है। ईरान ने यह भी आरोप लगाया कि पिछले 20 दिनों में अमेरिका ने न सिर्फ खुद समझौते को तोड़ा, बल्कि लेबनान के खिलाफ इजरायल की सैन्य कार्रवाई को शह देकर परोक्ष रूप से इस शांति समझौते की पीठ में छुरा घोंपा है।

‘हमने निभाई ईमानदारी, अमेरिका ने दिया धोखा’— अब आगे क्या होगा?

ईरान ने साफ किया है कि 18 जून को समझौते पर मुहर लगने के बाद से उसने अपनी सभी जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ निभाया था। उसने शांति बनाए रखने के लिए हर संभव कदम उठाया, लेकिन अमेरिका लगातार अलग-अलग बहानों की आड़ में अपने वादों से मुकरता रहा। अमेरिकी हमलों और तेल बैन के बाद अब खाड़ी देशों में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका है। जानकारों का मानना है कि ईरान पर इस नए प्रतिबंध और सैन्य कार्रवाई के बाद मिडिल ईस्ट में एक बार फिर बड़ा युद्ध छिड़ सकता है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

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