उत्तर प्रदेश के गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक एमएलसी चुनाव में मुकाबला दिलचस्प होता जा रहा है। बीजेपी से बगावत कर समाजवादी पार्टी में आए डॉ. संजयन त्रिपाठी ने अपनी जीत का भरोसा जताया है। उन्होंने शिक्षकों की पुरानी पेंशन, लंबित मानदेय और अधिकारों को चुनाव का प्रमुख मुद्दा बताया है। उनके दावों से इस सीट पर सियासी मुकाबला और तेज होने के आसार हैं।
बीजेपी छोड़ सपा में आए संजयन त्रिपाठी को मिला पार्टी का साथ
गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में समाजवादी पार्टी ने अपने उम्मीदवार को बदलकर डॉ. संजयन त्रिपाठी को मैदान में उतारा है। बीजेपी से टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने सपा का दामन थामा था। संजयन त्रिपाठी के मुताबिक, पार्टी में शामिल हुए उन्हें करीब 20 दिन हुए हैं, लेकिन इस दौरान सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव सहित कई नेताओं, विधायकों, पूर्व मंत्रियों और कार्यकर्ताओं का उन्हें पूरा सहयोग मिला है। उन्होंने कहा कि सपा में आने के बाद वह सहज महसूस कर रहे हैं। उनके इस बयान को चुनाव से पहले पार्टी के भीतर मिले समर्थन और अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
पुरानी पेंशन और मानदेय को लेकर सरकार पर साधा निशाना
डॉ. संजयन त्रिपाठी ने शिक्षकों की समस्याओं को उठाते हुए आरोप लगाया कि पिछले दो दशकों से शिक्षक अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अपेक्षित राहत नहीं मिली। उन्होंने पुरानी पेंशन योजना की बहाली और शिक्षकों के लंबित मानदेय का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। त्रिपाठी ने मौजूदा राजनीतिक नेतृत्व पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि शिक्षकों के हितों से जुड़े मुद्दों का समय रहते समाधान होना चाहिए था। उनका कहना है कि चुनाव जीतकर सदन पहुंचने वाले प्रतिनिधियों की प्राथमिकता शिक्षकों की समस्याओं को दूर करना होनी चाहिए। इन आरोपों के जरिए वह शिक्षकों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने और चुनावी बहस को उनके अधिकारों पर केंद्रित करने की कोशिश कर रहे हैं।
क्या शिक्षक मतदाताओं का भरोसा जीत पाएंगे सपा प्रत्याशी?
गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक एमएलसी सीट पर अब सबकी नजर इस बात पर है कि संजयन त्रिपाठी शिक्षकों के बीच कितना समर्थन जुटा पाते हैं। बीजेपी से बगावत के बाद सपा के टिकट पर चुनाव लड़ना इस मुकाबले को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बना रहा है। एक तरफ पुरानी पेंशन और मानदेय जैसे मुद्दे हैं, तो दूसरी तरफ उम्मीदवारों की संगठनात्मक ताकत और मतदाताओं से संपर्क भी निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। संजयन त्रिपाठी ने जीत का भरोसा जरूर जताया है, लेकिन उनके दावों की असली परीक्षा मतदान और परिणाम के दिन होगी। फिलहाल, इस चुनाव ने शिक्षक संगठनों की मांगों और राजनीतिक दलों की रणनीति को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
Read more-भूकंप से हिली एशिया की धरती! भारत, पाकिस्तान और चीन समेत 4 देशों में झटके
