बिहार के आरा से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां सेवानिवृत्त असिस्टेंट कमिश्नर राम कुमार सिंह हत्याकांड के आरोपियों को पुलिस ने अनोखे तरीके से सबक सिखाया है। बीते 15 अक्टूबर 2026 की सुबह जब राम कुमार सिंह अपनी पत्नी और बड़े बेटे के साथ रोजाना की तरह मॉर्निंग वॉक पर निकले थे, तभी घात लगाए बदमाशों ने उन पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दी थीं। जैन कॉलेज के पूर्वी गेट के पास हुई इस वारदात में उन्हें 7 से 8 गोलियां मारी गईं, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई थी। इस दुस्साहसिक वारदात के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी और पुलिस प्रशासन पर खुला दबाव बन गया था।
जमीन विवाद और साजिश की परतें
घटना की गंभीरता को देखते हुए भोजपुर पुलिस ने तुरंत एसआईटी का गठन किया, जिसका नेतृत्व सदर-1 एसडीपीओ कर रहे थे। पुलिस जांच में हैरान करने वाले खुलासे हुए हैं। भोजपुर एसपी अवधेश दीक्षित के अनुसार, इस पूरे हत्याकांड की जड़ें करोड़ों की जमीन के विवाद से जुड़ी हैं। सिंघी इलाके की इस विवादित जमीन पर साल 2006 से मृतक का कब्जा था, लेकिन विरोधी पक्ष ने कथित तौर पर साल 2025 में फर्जी तरीके से पावर ऑफ अटॉर्नी हासिल कर उसकी रजिस्ट्री करवा ली थी। आरोपियों ने इस वारदात को अंजाम देने के लिए 15-20 दिन पहले ही पूरी योजना बना ली थी और अपनी पहचान छिपाने के लिए नए सिम कार्ड, बैंक खातों और मोबाइल फोन्स का इस्तेमाल किया था।
गिरफ्तारी और कोलकाता तक का सफर
वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी पुलिस से बचने के लिए अलग-अलग राज्यों में छिपते फिर रहे थे। एसपी ने बताया कि हत्या के बाद आरोपी पहले सिलीगुड़ी, फिर गंगटोक और अंत में कोलकाता भागे थे, जहां वे होटलों में छिपकर रह रहे थे। पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस और एसआईटी की मुस्तैदी के दम पर मुख्य आरोपियों चंदन सिंह और अभिषेक कुमार को कोलकाता एयरपोर्ट से धर दबोचा, जबकि टीपू कुमार को भोजपुर से गिरफ्तार किया गया। इस मामले के एक अन्य आरोपी मनोज कुमार सिंह उर्फ लक्की को घटना के तुरंत बाद ही पुलिस ने दबोच लिया था और उसे पहले ही जेल भेजा जा चुका है।
डेढ़ किलोमीटर तक सड़क पर चली पुलिस की परेड
गुरुवार (22 अक्टूबर 2026) को पुलिस ने अपनी कार्रवाई का एक कड़ा संदेश देते हुए गिरफ्तार किए गए आरोपियों (चंदन सिंह, अभिषेक कुमार और टीपू कुमार) को नवादा थाने से आरा सिविल कोर्ट तक पैदल ही मार्च कराया। थाने से कोर्ट की यह दूरी करीब डेढ़ किलोमीटर है, जिसे पुलिस ने पूरी सुरक्षा के बीच आरोपियों को हथकड़ी डालकर पैदल तय किया। इस दौरान आरोपियों के चेहरे पर किसी तरह का नकाब नहीं पहनाया गया था ताकि जनता उनका चेहरा देख सके। दिनदहाड़े सड़क पर निकली इस पुलिस परेड को देखने के लिए स्थानीय लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी और हर तरफ इसी की चर्चा हो रही है।
