सहारनपुर। आधुनिकता के इस दौर में जहाँ शादियाँ अक्सर दिखावे और भारी-भरकम दहेज के लेन-देन का जरिया बन गई हैं, वहीं उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने समाज के सामने मानवता और संस्कारों का एक नया पैमाना स्थापित कर दिया है। यह कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है, जहाँ एक फौजी परिवार ने परंपराओं की बेड़ियों को तोड़कर केवल आदर्शों को अहमियत दी। सहारनपुर के सरसावा क्षेत्र में हुई यह हाई-प्रोफाइल शादी आज हर जुबान पर चर्चा का विषय बनी हुई है, क्योंकि यहाँ दूल्हे ने करोड़ों के दहेज प्रस्तावों को ठुकराकर एक ऐसा कदम उठाया, जिसकी कल्पना आज के समय में कम ही लोग कर पाते हैं।
बचपन का वो एक संकल्प और वर्दी का मान
इस अनोखी शादी के नायक हैं ग्राम मीरपुर निवासी मेजर मधुर चौधरी। मेजर मधुर के पिता चौधरी ओमपाल सिंह खुद एक रिटायर्ड सैनिक हैं, जिन्होंने अपने बेटे को देश सेवा के साथ-साथ समाज सेवा के संस्कार भी दिए। मेजर मधुर बताते हैं कि जब वे स्कूल में पढ़ते थे, तब अखबारों में दहेज के कारण बेटियों पर होने वाले अत्याचार और टूटते रिश्तों की खबरें उन्हें बहुत विचलित करती थीं। उसी मासूम उम्र में उन्होंने खुद से एक वादा किया था कि जब वे काबिल बनेंगे और एक बड़े अधिकारी पद पर आसीन होंगे, तो वे समाज की इस कुरीति के खिलाफ खुद उदाहरण पेश करेंगे। मेजर बनने के बाद जब शादी की बात आई, तो उन्होंने अपने बचपन के उस संकल्प को परिवार के सामने रखा। सुखद बात यह रही कि एक फौजी पिता और ममतामयी माता ने बिना किसी संकोच के अपने बेटे के इस क्रांतिकारी फैसले पर अपनी मुहर लगा दी।
₹1 और एक नारियल: जब संस्कारों के आगे फीकी पड़ी दौलत
मेजर मधुर चौधरी का विवाह ब्रजमंडल की रहने वाली कैप्टन ज्योति सौरोत के साथ संपन्न हुआ। दोनों ही देश की सुरक्षा में तैनात उच्च अधिकारी हैं, इसलिए यह शादी स्वाभाविक रूप से ‘हाई-प्रोफाइल’ थी। मधुर के परिवार के पास कई रईस घरानों से रिश्तों के प्रस्ताव आए थे, जहाँ भारी-भरकम धन-दौलत की पेशकश थी। लेकिन मेजर मधुर और उनके पिता ने साफ कर दिया कि उन्हें दहेज नहीं, बल्कि एक सुशिक्षित और संस्कारी बेटी चाहिए। विवाह की रस्मों के दौरान वधू पक्ष जब शगुन देने लगा, तो दूल्हा पक्ष ने केवल 1 रुपया और एक नारियल स्वीकार कर सबको हैरान कर दिया। मधुर की माता ने भावुक होकर कहा कि उनके लिए उनकी बहू ही घर की सबसे बड़ी ‘लक्ष्मी’ है और संस्कारी बेटी से बड़ी कोई संपत्ति दुनिया में नहीं हो सकती।
युवाओं के लिए प्रेरणा और समाज को कड़ा संदेश
यह विवाह केवल दो परिवारों का मिलन नहीं, बल्कि दहेज प्रथा के खिलाफ एक मूक क्रांति है। मेजर मधुर ने शादी के बाद देश के युवाओं के नाम एक विशेष संदेश साझा किया है। उन्होंने अपील की है कि युवा पीढ़ी को केवल करियर में ही नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव में भी आगे आना चाहिए। उनका मानना है कि अगर एक शिक्षित व्यक्ति भी दहेज जैसी कुरीतियों का समर्थन करता है, तो उसकी शिक्षा का कोई अर्थ नहीं रह जाता। आज सहारनपुर का यह फौजी परिवार पूरे उत्तर प्रदेश के लिए एक प्रेरणा बन गया है। सरसावा क्षेत्र के लोग इस साहसी कदम की सराहना कर रहे हैं और इसे समाज की नई दिशा बता रहे हैं। यह शादी साबित करती है कि जब वर्दी और संस्कार एक साथ मिलते हैं, तो समाज में सकारात्मक बदलाव की नींव पड़ती है।
