जयपुर के प्रतिष्ठित नीरजा मोदी स्कूल में चौथी कक्षा की 9 साल की छात्रा अमायरा की मौत के मामले में एक ऐसा नया मोड़ आया है, जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। परिवार द्वारा जारी किए गए नए सीसीटीवी फुटेज ने स्कूल प्रशासन और क्लास टीचर के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं। वीडियो में साफ दिख रहा है कि घटना वाले दिन अमायरा मानसिक रूप से बेहद परेशान थी। क्लास के ही कुछ बच्चे बिना अनुमति के डिजिटल स्लेट लेकर आए थे, जिस पर कुछ आपत्तिजनक लिखकर उसे लगातार चिढ़ाया और प्रताड़ित किया जा रहा था। जब मासूम अमायरा इस मानसिक प्रताड़ना (बुलिंग) से तंग आकर अपनी क्लास टीचर पुनीता शर्मा के पास न्याय की उम्मीद में गई, तो वहां उसे सिर्फ दुत्कार मिली। टीचर ने उसकी सिसकियों और शिकायत को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया और दूसरे बच्चों की बातों में उलझ गईं। वीडियो में साफ दिख रहा है कि कैसे एक नौ साल की बच्ची बेहद मायूस और टूटे हुए दिल के साथ अपनी सीट पर वापस लौटती है।
लापरवाही की हद: पैर पटकती हुई दौड़ती रही मासूम, पर किसी ने नहीं रोका
यह सीसीटीवी फुटेज स्कूल की सुरक्षा व्यवस्था और स्टाफ की संवेदनशीलता पर सबसे बड़ा तमाचा है। पहली बार अनसुनी किए जाने के बाद, अमायरा हिम्मत जुटाकर दोबारा अपनी क्लास टीचर के पास मदद मांगने पहुंचती है। लेकिन इस बार भी टीचर का रवैया उदासीन रहता है। फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि इस घोर अनदेखी से निराश और गुस्से से भरी अमायरा पैर पटकती हुई क्लासरूम से बाहर निकल जाती है। वह कॉरिडोर से होते हुए तेजी से दौड़कर स्कूल की चौथी मंजिल की तरफ बढ़ती है। हैरान करने वाली बात यह है कि इस पूरे रास्ते में स्कूल का कोई भी शिक्षक, आया या सुरक्षा गार्ड मुस्तैद नहीं था, जिसने उस रोती और भागती हुई बच्ची को रोकने या टोकने की जहमत उठाई हो। चंद पलों के भीतर ही वह चौथी मंजिल की रेलिंग पर चढ़ती है और वहां से नीचे छलांग लगा देती है। यह फुटेज चीख-चीख कर गवाही दे रहा है कि अगर समय रहते किसी एक शख्स ने भी उसे संभाल लिया होता, तो आज अमायरा जिंदा होती।
हंसती-खेलती बच्ची अचानक क्यों टूटी? परिवार के दावों को मिला पुख्ता सबूत
स्कूल प्रशासन अब तक इस मामले में खुद को बचाने के लिए तरह-तरह की कहानियां गढ़ रहा था, लेकिन उसी दिन के अन्य सीसीटीवी फुटेज ने सच्चाई का आईना दिखा दिया है। घटना से कुछ समय पहले के वीडियो में अमायरा बिल्कुल सामान्य रूप से पढ़ाई करती और अपनी डांस क्लास में बेहद खुश होकर थिरकती नजर आ रही है। इससे परिवार का यह दावा पूरी तरह सच साबित होता है कि वह पहले से किसी मानसिक तनाव या डिप्रेशन का शिकार नहीं थी। वह एक जिंदादिल बच्ची थी, जिसे स्कूल के भीतर ही अचानक पैदा हुए हालातों और क्लासरूम बुलिंग ने मानसिक रूप से इस कदर तोड़ दिया कि उसने इतना आत्मघाती कदम उठा लिया। शिकायत के बावजूद टीचर का रवैया उसके लिए आखिरी उम्मीद टूटने जैसा था, जिसने उसे गहरे सदमे में धकेल दिया।
इंसाफ की लड़ाई: पुलिस चार्जशीट पर उठे सवाल और स्कूल की मान्यता पर गाज
1 नवंबर को हुई इस दर्दनाक घटना के बाद से ही अमायरा के माता-पिता न्याय के लिए भटक रहे हैं। हालांकि, इस मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने नीरजा मोदी स्कूल की मान्यता को पहले ही निलंबित कर दिया था। लेकिन अब पुलिस की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। पुलिस द्वारा अदालत में दाखिल की गई चार्जशीट पर पीड़ित परिवार ने गंभीर आपत्तियां जताई हैं। परिवार का सीधा आरोप है कि जांच में जानबूझकर ढिलाई बरती गई और रसूखदार आरोपियों को बचाने के लिए सबूतों को दबाने की कोशिश की गई। अब इस नए और अकाट्य सीसीटीवी फुटेज के सामने आने के बाद स्कूल प्रबंधन की जवाबदेही और पुलिसिया जांच के तरीकों पर एक बार फिर से नए सिरे से सवाल खड़े हो गए हैं। यह मामला अब सिर्फ एक सुसाइड नहीं, बल्कि स्कूल सिस्टम की संवेदनहीनता के खिलाफ इंसाफ की एक बड़ी जंग बन चुका है।
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