ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के नाम पर झूठे यौन शोषण के आरोप लगाने से जुड़े मामले ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। इस प्रकरण पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई हुई, जहां अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार से एक सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने को कहा है। कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए सभी पक्षों की बात सुनने की आवश्यकता जताई। इसके साथ ही जिस व्यक्ति ने शंकराचार्य के खिलाफ आरोप लगाए थे, उसे भी मामले में पक्षकार बनाने का निर्देश दिया गया है। अदालत के इस कदम के बाद मामले पर लोगों की नजरें टिक गई हैं। अब सभी को अगली सुनवाई और सरकार की रिपोर्ट का इंतजार है, जिससे मामले की वास्तविक स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
याचिका में लगाए गए गंभीर आरोप
यह मामला शाहजहांपुर के एक पत्रकार द्वारा दाखिल की गई याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता का दावा है कि कुछ लोगों ने उनसे संपर्क कर एक धार्मिक संत के खिलाफ गंभीर आरोप लगाने के लिए दबाव बनाया था। याचिका के अनुसार, कथित तौर पर उन्हें आर्थिक लाभ का लालच भी दिया गया। पत्रकार का कहना है कि उन्होंने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया, जिसके बाद उन्हें और उनके परिवार को लगातार धमकियां मिलने लगीं। याचिका में यह भी कहा गया है कि परिवार की गतिविधियों पर नजर रखे जाने जैसी घटनाएं भी सामने आईं। इन आरोपों की सत्यता की जांच अभी होनी बाकी है, लेकिन अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार से जवाब मांगा है।
सुरक्षा और निष्पक्ष जांच की उठी मांग
याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि उन्होंने इस संबंध में कई प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को शिकायत दी थी। उनका आरोप है कि शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। याचिका में यह भी कहा गया है कि परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है, क्योंकि उनके घर में नाबालिग बच्चे भी हैं। इसी आधार पर हाईकोर्ट से सुरक्षा और कानूनी संरक्षण की मांग की गई है। अदालत ने मामले की परिस्थितियों को देखते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह पूरे प्रकरण की जानकारी एकत्र कर निर्धारित समय के भीतर रिपोर्ट दाखिल करे। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत की निगरानी में होने वाली कार्रवाई से मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है।
अगली सुनवाई पर टिकी हैं सबकी नजरें
हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 16 जुलाई 2026 को निर्धारित की है। इस दौरान सरकार की ओर से पेश की जाने वाली रिपोर्ट और अन्य पक्षों की दलीलों पर विचार किया जाएगा। फिलहाल अदालत ने किसी भी पक्ष के आरोपों को सही या गलत नहीं माना है और पूरे मामले को जांच के दायरे में रखा है। कानूनी प्रक्रिया के तहत अब संबंधित पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा। यह मामला धार्मिक, सामाजिक और कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, इसलिए इसकी हर गतिविधि पर लोगों की नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में अदालत के सामने प्रस्तुत होने वाले तथ्यों और रिपोर्ट के आधार पर मामले की दिशा तय होगी।
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