अमेरिका के विदेश मंत्री Marco Rubio के ताजमहल दौरे ने अचानक अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक बहस का रूप ले लिया है। भारत दौरे पर आए रुबियो सोमवार को अपनी पत्नी जेनेट रुबियो के साथ आगरा पहुंचे, जहां उन्होंने ताजमहल का दीदार किया और इसे दुनिया में प्रेम की सबसे खूबसूरत निशानियों में से एक बताया। लेकिन उनकी यह यात्रा जल्द ही सोशल मीडिया पर विवाद का विषय बन गई। भारत में स्थित ईरानी वाणिज्य दूतावास ने रुबियो की ताजमहल के सामने खिंचवाई गई तस्वीर शेयर करते हुए अमेरिका पर तीखा तंज कसा। दूतावास ने कहा कि अगर रुबियो को इतिहास और वास्तुकला की सही समझ होती, तो वह शायद इस स्मारक के सामने इस तरह तस्वीर नहीं खिंचवाते। ईरान ने दावा किया कि ताजमहल के निर्माण में ईरानी वास्तुकारों और कलाकारों की अहम भूमिका रही थी और यह स्मारक एक ईरानी महिला की याद में बनाया गया था। इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई और लोग अमेरिका तथा ईरान के रिश्तों को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देने लगे।
ईरानी वाणिज्य दूतावास ने अमेरिका पर बोला हमला
हैदराबाद स्थित ईरानी वाणिज्य दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लंबा पोस्ट साझा करते हुए सीधे अमेरिकी नीतियों को निशाने पर लिया। पोस्ट में कहा गया कि जिस सभ्यता और कला की मिसाल ताजमहल में दिखाई देती है, उसी ईरानी सभ्यता को आज अमेरिका खत्म करने की धमकी दे रहा है। दूतावास ने यह भी लिखा कि अमेरिका दूसरी सभ्यताओं का सम्मान करने के बजाय उन्हें कमजोर करने की कोशिश करता रहा है। पोस्ट में यह संकेत भी दिया गया कि ताजमहल केवल भारत की धरोहर ही नहीं बल्कि फारसी कला और वास्तुकला की भी बड़ी पहचान है। ईरान के इस बयान को कई लोग सीधे अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के हालिया बयानों से जोड़कर देख रहे हैं। सोशल मीडिया पर यह पोस्ट तेजी से वायरल हो गई और हजारों लोगों ने इस पर प्रतिक्रिया दी। कुछ यूजर्स ने ईरान के बयान का समर्थन किया, जबकि कई लोगों ने इसे राजनीतिक प्रचार बताया। हालांकि अमेरिकी विदेश मंत्रालय की ओर से इस टिप्पणी पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
ट्रंप के बयान से जोड़ा जा रहा पूरा मामला
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरानी वाणिज्य दूतावास का यह तंज केवल रुबियो के ताजमहल दौरे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहा तनाव भी जुड़ा हुआ है। हाल के महीनों में दोनों देशों के रिश्तों में फिर से तल्खी बढ़ी है। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ की गई सैन्य कार्रवाई के बाद हालात काफी तनावपूर्ण हो गए थे। इसके जवाब में ईरान ने भी हमले किए थे, जिसके बाद पूरी दुनिया की नजरें पश्चिम एशिया पर टिक गई थीं। बाद में दोनों पक्षों के बीच संघर्ष विराम पर सहमति बनी, लेकिन बयानबाजी अब भी जारी है। इसी बीच ट्रंप का एक बयान भी काफी चर्चा में रहा था, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर समझौता नहीं हुआ तो “एक पूरी सभ्यता खत्म हो सकती है।” माना जा रहा है कि ईरानी दूतावास ने अपने पोस्ट में इसी बयान की ओर इशारा करते हुए अमेरिका पर निशाना साधा। राजनीतिक जानकारों के अनुसार ईरान इस मुद्दे के जरिए दुनिया को यह संदेश देना चाहता है कि उसकी सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
भारत दौरे के बीच चर्चा में आया ताजमहल
मार्को रुबियो का भारत दौरा कई रणनीतिक बैठकों और कूटनीतिक चर्चाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत और अमेरिका के बीच रक्षा, व्यापार और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को लेकर लगातार सहयोग बढ़ रहा है। ऐसे समय में रुबियो का ताजमहल दौरा एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के तौर पर देखा जा रहा था, लेकिन ईरान की टिप्पणी ने इसे राजनीतिक रंग दे दिया। आगरा में रुबियो की सुरक्षा के लिए कड़े इंतजाम किए गए थे और बड़ी संख्या में विदेशी मीडिया भी वहां मौजूद रही। ताजमहल घूमने के दौरान रुबियो ने इसकी सुंदरता की खुलकर तारीफ की थी। हालांकि उनके इस दौरे से ज्यादा चर्चा अब ईरान के बयान की हो रही है। सोशल मीडिया पर लोग इतिहास, वास्तुकला और राजनीति को जोड़कर बहस कर रहे हैं। कुछ लोग इसे कूटनीतिक व्यंग्य बता रहे हैं तो कुछ इसे अंतरराष्ट्रीय राजनीति का नया प्रतीक मान रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि अमेरिका इस बयान पर कोई जवाब देता है या नहीं, लेकिन फिलहाल ताजमहल एक बार फिर वैश्विक राजनीति के केंद्र में आ गया है।
