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हाथ-पैर खो दिए, फिर भी गोल्ड पर लगाया निशाना! पायल नाग की कहानी सुनकर हर कोई हो जाएगा भावुक

पायल नाग की प्रेरणादायक कहानी—हाथ-पैर खोने के बाद भी नहीं मानी हार, आर्चरी में गोल्ड जीतकर बनीं दुनिया के लिए मिसाल।

Payal Nag

Payal Nag: ओडिशा की रहने वाली Payal Nag की कहानी किसी प्रेरणादायक फिल्म से कम नहीं है। बचपन में एक भयानक हादसे ने उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल दी। 11,000 वोल्ट के हाई-टेंशन तार की चपेट में आने से उन्होंने अपने दोनों हाथ और दोनों पैर खो दिए। यह किसी भी इंसान के लिए जीवन का सबसे कठिन मोड़ हो सकता है, लेकिन पायल ने इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। परिवार की आर्थिक स्थिति भी कमजोर थी, जिसके चलते उन्हें अनाथालय में रहना पड़ा, लेकिन उन्होंने हालात से हार मानने के बजाय उनसे लड़ने का फैसला किया।

मुंह से ड्रॉइंग से शुरू हुआ सफर

अनाथालय में रहते हुए पायल नाग ने अपने भीतर की ताकत को पहचाना। उन्होंने मुंह से पेन पकड़कर ड्रॉइंग बनाना शुरू किया। यह सिर्फ एक कला नहीं, बल्कि उनके आत्मविश्वास को मजबूत करने का जरिया बन गया। धीरे-धीरे उनकी बनाई तस्वीरें लोगों तक पहुंचीं और सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं। लोगों ने उनकी प्रतिभा और जज्बे को सराहा, जिससे उन्हें नई पहचान मिली। यही वह पल था, जब उनकी जिंदगी ने एक नया मोड़ लिया और उन्होंने आगे बढ़ने का रास्ता तय किया।

आर्चरी में कदम रखा, दुनिया को कर दिया हैरान

ड्रॉइंग से मिली पहचान के बाद पायल ने खेल की दुनिया में कदम रखने का फैसला किया। उन्होंने आर्चरी को चुना और कड़ी मेहनत के साथ इस खेल को सीखना शुरू किया। बिना हाथ-पैर के तीरंदाजी करना अपने आप में एक असंभव सा काम लगता है, लेकिन पायल ने इसे भी संभव कर दिखाया। 2026 में बैंकॉक में आयोजित वर्ल्ड आर्चरी पैरा सीरीज में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल तक का सफर तय किया। वहां उनका मुकाबला दुनिया की नंबर-1 पैरा आर्चर Sheetal Devi से हुआ।

गोल्ड मेडल जीतकर रचा इतिहास, बनीं मिसाल

फाइनल मुकाबले में पायल नाग ने 139-136 के स्कोर से शीतल देवी को हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। यह जीत सिर्फ एक पदक नहीं, बल्कि उनके संघर्ष, मेहनत और अटूट विश्वास का परिणाम थी। इस जीत के साथ वह दुनिया की पहली क्वाड्रूपल एम्पुटी पैरा आर्चर बन गईं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल जीता। पदक समारोह के दौरान जब राष्ट्रगान बज रहा था, तब शीतल देवी ने उनकी मदद की, जो खेल भावना की बेहतरीन मिसाल बन गई। पायल की कहानी आज लाखों लोगों को यह सिखाती है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी मुश्किल रास्ता रोक नहीं सकता।

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