Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ के सुदूर वनांचल में बसे एक छोटे से गांव में उस समय इतिहास बन गया, जब पहली बार कोई बड़ा प्रशासनिक अधिकारी वहां पहुंचा। Gaurela-Pendra-Marwahi जिले के साचरखूंटा गांव के लोग अब तक सिर्फ सुनते थे कि अफसर कैसे होते हैं, लेकिन उन्होंने कभी किसी को अपने बीच नहीं देखा था। चारों ओर घने जंगल और जिला मुख्यालय से करीब 65 किलोमीटर की दूरी ने इस गांव को प्रशासन से दूर रखा था। लेकिन हाल ही में जिला कलेक्टर Leena Mandavi अचानक यहां पहुंचीं। खास बात यह रही कि उन्होंने दुर्गम रास्तों को पार करने के लिए बाइक का सहारा लिया, जिससे ग्रामीणों के बीच उत्साह और आश्चर्य का माहौल बन गया।
बाइक से पहुंचीं गांव के बीच
यह दौरा ‘ग्राम जोहार अभियान’ के तहत आयोजित जनचौपाल का हिस्सा था। साचरखूंटा तक पहुंचने के लिए कोई पक्की सड़क नहीं है, ऐसे में कलेक्टर लीना मंडावी ने ग्राम सचिव के साथ करीब 4 किलोमीटर तक बाइक से सफर किया। ऊबड़-खाबड़ रास्तों, जंगल और पगडंडियों को पार करते हुए जब वे गांव पहुंचीं, तो ग्रामीणों ने उनका स्वागत किया। आम के पेड़ के नीचे जनचौपाल लगाई गई, जहां विशेष पिछड़ी जनजाति पंडो समुदाय के लोग बड़ी संख्या में मौजूद रहे। इस दौरान कलेक्टर ने ग्रामीणों से सीधे बातचीत की और उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना, जिससे लोगों को पहली बार लगा कि प्रशासन वास्तव में उनके पास पहुंचा है।
जनचौपाल में उठीं समस्याएं
जनचौपाल के दौरान ग्रामीणों ने पहुंच मार्ग, वन अधिकार पत्र, पानी, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं सामने रखीं। कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए और कई योजनाओं का लाभ दिलाने का भरोसा दिया। उन्होंने गांव में सड़क निर्माण और प्राथमिक स्कूल की स्वीकृति के लिए पहल करने की बात कही। साथ ही ग्रामीणों को डबरी और कुआं निर्माण जैसी हितग्राही योजनाओं के लिए आवेदन करने के लिए प्रेरित किया। इस दौरान विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने कृषि, फसल बीमा, पशुपालन, श्रमिक पंजीयन और सामाजिक सुरक्षा पेंशन जैसी योजनाओं की जानकारी भी दी, ताकि लोग सरकारी सुविधाओं से जुड़ सकें।
शिक्षा, स्वास्थ्य और जनजातीय विकास पर विशेष फोकस
कलेक्टर लीना मंडावी ने अपने दौरे के दौरान सामाजिक जागरूकता पर भी जोर दिया। उन्होंने ग्रामीणों से बच्चों को नियमित रूप से स्कूल और आंगनबाड़ी भेजने की अपील की और बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं से दूर रहने को कहा। स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए गए कि गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच हो और उन्हें सभी जरूरी दस्तावेज और सुविधाएं मिलें। साचरखूंटा गांव में पहली बार किसी कलेक्टर के पहुंचने से ग्रामीणों में भरोसा बढ़ा है। वहीं, पंडो जनजाति के लोगों ने भी मांग उठाई कि उन्हें विशेष पिछड़ी जनजाति के तहत मिलने वाले सभी लाभ पूरी तरह मिलें। यह दौरा न केवल प्रशासनिक पहल का उदाहरण बना, बल्कि इसने यह भी दिखाया कि सही प्रयासों से दूर-दराज के इलाकों तक भी विकास की रोशनी पहुंच सकती है।
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