भारत और पाकिस्तान के रिश्तों को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। दोनों देशों के 117 प्रमुख लोगों ने भारत के प्रधानमंत्री और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को खुला पत्र लिखकर आपसी बातचीत शुरू करने की अपील की है। इसी बीच संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में भारत ने आतंकवाद के मुद्दे पर अपना रुख पूरी मजबूती से रखा। भारत ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में किसी भी तरह का दोहरा रवैया नहीं अपनाया जाना चाहिए। भारतीय प्रतिनिधि ने दुनिया से अपील की कि आतंकवाद को किसी भी आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर नहीं देखा जाना चाहिए। उनका कहना था कि आतंकवाद चाहे किसी भी रूप में हो, उसके खिलाफ एक जैसी कार्रवाई जरूरी है।
भारत ने आतंकवाद पर दुनिया को दिया कड़ा संदेश
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने अपने संबोधन में कहा कि केवल आतंकवादी घटनाओं की निंदा करना पर्याप्त नहीं है। जरूरी यह है कि आतंकवाद की योजना बनाने वाले, उसे आर्थिक मदद देने वाले और उसे समर्थन देने वालों के खिलाफ भी सख्त कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि अगर दुनिया अच्छे और बुरे आतंकवाद जैसी सोच से बाहर नहीं निकलेगी, तो वैश्विक स्तर पर आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई कमजोर पड़ जाएगी। भारत ने यह भी कहा कि सीमा पार आतंकवाद और आतंकी नेटवर्क आज भी अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं। इसलिए सभी देशों को मिलकर ठोस और समान नीति अपनानी होगी।
नई तकनीक बन रही आतंकवाद की नई चुनौती
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में यह भी चिंता जताई कि आतंकवादी संगठन अब आधुनिक तकनीकों का तेजी से इस्तेमाल कर रहे हैं। ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डीपफेक, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग, सोशल मीडिया और डार्क वेब जैसी तकनीकों का उपयोग गलत गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। भारत ने कहा कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए दुनिया को मजबूत और सुरक्षित डिजिटल व्यवस्था तैयार करनी होगी। साथ ही देशों के बीच खुफिया जानकारी साझा करने की व्यवस्था को और प्रभावी बनाने की जरूरत है, ताकि आतंकवादी गतिविधियों को समय रहते रोका जा सके।
आतंकवाद की फंडिंग रोकने पर भी भारत का जोर
भारत ने अपने संबोधन में आतंकवाद की आर्थिक मदद रोकने पर भी विशेष जोर दिया। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई तभी सफल होगी, जब उसकी फंडिंग पूरी तरह रोकी जाएगी। इसके लिए फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) के नियमों का सख्ती से पालन जरूरी है। भारत ने सभी देशों से अपील की कि वे आतंकवादियों और उनके समर्थकों के खिलाफ बिना किसी भेदभाव के कार्रवाई करें और किसी भी क्षेत्र को आतंकवाद के लिए सुरक्षित ठिकाना न बनने दें। फिलहाल भारत का यह संदेश ऐसे समय में आया है, जब एक ओर दोनों देशों के बीच बातचीत की मांग उठ रही है और दूसरी ओर आतंकवाद को लेकर भारत अंतरराष्ट्रीय मंच पर लगातार अपना कड़ा रुख दोहरा रहा है।
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