BRICS Summit 2026: भारत में 12 और 13 सितंबर को होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन से पहले डी-डॉलराइजेशन और ब्रिक्स पेमेंट सिस्टम को लेकर देश का रुख सामने आया है। सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत कई बड़े नेता शामिल होने वाले हैं। इसी बीच BRICS International के चेयरमैन पवन जोशी की टिप्पणी ने इस मुद्दे को चर्चा में ला दिया है।
BRICS पेमेंट सिस्टम पर भारत की क्या तैयारी?
BRICS International के चेयरमैन पवन जोशी ने कहा कि संगठन के तहत एक ऐसे क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट सिस्टम पर काम किया जा रहा है, जो अलग-अलग देशों में पहले से मौजूद भुगतान व्यवस्थाओं को आपस में जोड़ने का काम करेगा। इसका उद्देश्य देशों के बीच लेन-देन को आसान और तेज बनाना बताया गया है। उनके मुताबिक इस पहल में राष्ट्रीय संप्रभुता को खास महत्व दिया जा रहा है। यानी कोशिश किसी मौजूदा व्यवस्था को खत्म करने के बजाय अलग-अलग प्रणालियों के बीच बेहतर तालमेल बनाने की है।
डी-डॉलराइजेशन को लेकर क्या बोला भारत?
डी-डॉलराइजेशन यानी अंतरराष्ट्रीय कारोबार में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने की चर्चा BRICS के एजेंडे में लंबे समय से बनी हुई है। इसी मुद्दे पर पवन जोशी ने कहा कि इसे लेकर लोगों के बीच एक गलतफहमी है। उन्होंने संकेत दिया कि BRICS की कोशिश किसी एक मुद्रा को हटाने की घोषणा करने से ज्यादा देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर केंद्रित है। उनका कहना है कि भारत अपने पड़ोसी देशों और दूसरे साझेदारों के साथ मिलकर नागरिकों, कंपनियों और कारोबारियों के लिए तेज भुगतान व्यवस्था तैयार करने की दिशा में काम करना चाहता है।
दिल्ली में जुटेंगे दुनिया के कई बड़े नेता
BRICS Summit 2026 के लिए नई दिल्ली पूरी तरह तैयार है। भारत मंडपम में होने वाले इस बड़े अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पहुंच चुके हैं। उनके अलावा चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन समेत कई नेताओं के शामिल होने की उम्मीद है। शी जिनपिंग के 12 सितंबर को दिल्ली पहुंचने की संभावना है।
पुतिन और जिनपिंग की मौजूदगी से बढ़ा सम्मेलन का महत्व
इस बार BRICS सम्मेलन पर दुनिया की नजर इसलिए भी है क्योंकि भारत में रूस और चीन के शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी रहेगी। सम्मेलन में आर्थिक सहयोग, भुगतान व्यवस्था और वैश्विक व्यापार के साथ कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। ऐसे में डी-डॉलराइजेशन को लेकर भारत का रुख और BRICS पेमेंट सिस्टम की दिशा आने वाले समय में काफी महत्वपूर्ण हो सकती है। अब सभी की नजर 12 और 13 सितंबर की बैठकों और उनमें होने वाले फैसलों पर टिकी है।
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