भारत ने रावी नदी के पानी को लेकर बड़ा कदम उठाया है। लंबे समय से ऐसा होता रहा कि रावी नदी का कुछ अतिरिक्त पानी बिना इस्तेमाल के पाकिस्तान की ओर बह जाता था। अब भारत ने तय किया है कि वह अपने हिस्से का पूरा पानी खुद इस्तेमाल करेगा। इसके लिए पंजाब में बन रहा Shahpur Kandi Dam बेहद अहम माना जा रहा है। यह परियोजना काफी समय से अटकी हुई थी, लेकिन अब इसे तेजी से पूरा किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि भारत को सिंधु जल संधि के तहत रावी, ब्यास और सतलुज नदियों का पूरा उपयोग करने का अधिकार है। ऐसे में जो पानी अब तक बिना उपयोग के सीमा पार चला जाता था, उसे रोककर खेती, बिजली और विकास के काम में लगाया जाएगा।
क्या है शाहपुर कंडी बांध और कैसे बदलेगी तस्वीर?
शाहपुर कंडी बांध रावी नदी पर बनाया जा रहा एक बड़ा प्रोजेक्ट है। इस बांध के बनने से पानी को जमा किया जाएगा और नहरों के जरिए खेतों तक पहुंचाया जाएगा। इससे पंजाब और आसपास के इलाकों में सिंचाई की सुविधा बढ़ेगी। साथ ही, इस परियोजना से बिजली भी बनाई जाएगी, जिससे स्थानीय लोगों को फायदा होगा। पहले जो पानी बेकार चला जाता था, अब उसका सही इस्तेमाल हो सकेगा। सरकार का कहना है कि यह कदम पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय नियमों के दायरे में है और किसी समझौते का उल्लंघन नहीं किया जा रहा है।
पाकिस्तान पर क्या पड़ सकता है असर?
रावी नदी का अतिरिक्त पानी अब पाकिस्तान तक पहले जैसा नहीं पहुंचेगा। खासकर गर्मियों के मौसम में, जब पानी की जरूरत ज्यादा होती है, तब असर ज्यादा महसूस हो सकता है। हालांकि भारत ने साफ किया है कि वह केवल अपने हिस्से का पानी उपयोग कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पानी का प्रवाह कम होता है तो पाकिस्तान को अपने जल प्रबंधन में बदलाव करना पड़ेगा। खेती और पेयजल पर इसका असर पड़ सकता है। दक्षिण एशिया में पानी का मुद्दा पहले से संवेदनशील रहा है, इसलिए इस कदम को रणनीतिक नजर से भी देखा जा रहा है।
किसानों और विकास को मिलेगा सीधा फायदा
इस परियोजना से भारत के किसानों को सबसे ज्यादा लाभ होगा। ज्यादा पानी मिलने से फसल उत्पादन बढ़ेगा और सूखे की समस्या कम होगी। बिजली उत्पादन से स्थानीय विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा, बांध बनने से रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में पानी की अहमियत और बढ़ने वाली है। ऐसे में अपने संसाधनों का सही उपयोग करना जरूरी है। शाहपुर कंडी बांध इसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
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