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भारत से मैच खेलने पर आखिर किसके दबाव में झुका पाकिस्तान? मोहसिन नकवी ने खुद खोल दिया राज

भारत-पाकिस्तान मैच को लेकर हाल ही में ऐसा मोड़ आया जिसने क्रिकेट जगत को हैरान कर दिया। टी20 वर्ल्ड कप 2026 में दोनों टीमों के बीच मुकाबले से पहले पाकिस्तान की ओर से मैच न खेलने के संकेत दिए गए थे। इस खबर ने फैंस के बीच हलचल मचा दी थी, क्योंकि भारत-पाकिस्तान मैच सिर्फ एक खेल नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की भावनाओं से जुड़ा होता है। शुरुआत में माना जा रहा था कि यह फैसला इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल यानी International Cricket Council (ICC) के साथ किसी मतभेद की वजह से लिया गया है, लेकिन बाद में सच्चाई कुछ और ही निकली। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के चेयरमैन Mohsin Naqvi ने चुप्पी तोड़ते हुए साफ किया कि मामला ICC से नहीं बल्कि राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर हुई बातचीत से जुड़ा था। उनके बयान के बाद यह साफ हो गया कि भारत-पाकिस्तान मैच पर लिया गया शुरुआती रुख पूरी तरह अंतिम फैसला नहीं था, बल्कि परिस्थितियों के अनुसार बदला गया।

किसके कहने पर बदला गया फैसला?

मोहसिन नकवी ने खुलासा किया कि भारत-पाकिस्तान मैच को लेकर पाकिस्तान ने जो यू-टर्न लिया, वह किसी दबाव में नहीं बल्कि आपसी संवाद के बाद लिया गया निर्णय था। उन्होंने बताया कि इस मामले में श्रीलंका के राष्ट्रपति Ranil Wickremesinghe की अहम भूमिका रही। बताया गया कि श्रीलंका की ओर से मध्यस्थता की कोशिश की गई ताकि टूर्नामेंट की गरिमा बनी रहे और कोई बड़ा विवाद खड़ा न हो। नकवी के मुताबिक, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif से भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई और अंततः यह तय किया गया कि खेल को राजनीति से अलग रखते हुए भारत-पाकिस्तान मैच खेला जाएगा। उन्होंने कहा कि यह फैसला लगभग “50-50” स्थिति में लिया गया था, यानी शुरुआत में असमंजस जरूर था, लेकिन अंत में खेल भावना को प्राथमिकता दी गई। इस बयान ने साफ कर दिया कि ICC ने सीधे तौर पर पाकिस्तान को मजबूर नहीं किया था, बल्कि क्षेत्रीय स्तर पर हुई बातचीत ने तस्वीर बदल दी।

विवाद की असली वजह क्या थी?

भारत-पाकिस्तान मैच से पहले जो तनाव की स्थिति बनी, उसकी पृष्ठभूमि भी कम दिलचस्प नहीं थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान की ओर से कुछ शर्तों और व्यवस्थाओं को लेकर आपत्ति जताई गई थी। इसके अलावा टूर्नामेंट के आयोजन और कुछ कूटनीतिक मुद्दों को लेकर भी असंतोष की बातें सामने आई थीं। हालांकि आधिकारिक रूप से इन कारणों को विस्तार से नहीं बताया गया, लेकिन इतना जरूर कहा गया कि पाकिस्तान किसी भी तरह की “अनदेखी” या “असम्मान” बर्दाश्त नहीं करना चाहता था। बाद में जब बातचीत आगे बढ़ी और सभी पक्षों को भरोसा दिलाया गया कि टूर्नामेंट निष्पक्ष तरीके से होगा, तब पाकिस्तान ने अपना रुख नरम किया। मोहसिन नकवी ने यह भी कहा कि भारत-पाकिस्तान मैच जैसे बड़े मुकाबले से पीछे हटना आसान फैसला नहीं होता, क्योंकि इससे फैंस, स्पॉन्सर्स और क्रिकेट की छवि पर असर पड़ता है। इसी को ध्यान में रखते हुए अंतिम फैसला लिया गया।

भारत-पाकिस्तान मैच का असर और आगे की राह

भारत-पाकिस्तान मैच हमेशा से हाई वोल्टेज मुकाबला रहा है। चाहे वह वर्ल्ड कप हो या कोई और बड़ा टूर्नामेंट, इस मुकाबले पर पूरी दुनिया की नजर रहती है। इस बार भी जब दोनों टीमें आमने-सामने आईं तो स्टेडियम खचाखच भरा हुआ था और करोड़ों लोगों ने टीवी व डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मैच देखा। पाकिस्तान के शुरुआती रुख और बाद में लिए गए यू-टर्न ने इस मैच को और भी ज्यादा चर्चा में ला दिया। मोहसिन नकवी के बयान के बाद अब यह साफ हो चुका है कि पाकिस्तान ने ICC के दबाव में नहीं बल्कि क्षेत्रीय बातचीत और आपसी समझ के आधार पर फैसला बदला। इससे यह संदेश भी गया कि खेल को राजनीति से ऊपर रखा जा सकता है, अगर इच्छाशक्ति हो। आने वाले समय में भी भारत-पाकिस्तान मैच को लेकर ऐसे विवाद खड़े हो सकते हैं, लेकिन इस घटनाक्रम ने दिखा दिया कि संवाद और संतुलन से समाधान निकाला जा सकता है। फिलहाल फैंस के लिए सबसे बड़ी राहत यही है कि क्रिकेट का सबसे बड़ा मुकाबला जारी रहेगा और मैदान पर ही फैसला होगा।

 

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