लोकसभा में एंटी पेपर लीक बिल पर जारी चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने केंद्र सरकार को कई मुद्दों पर घेरा। उन्होंने छात्र आंदोलन, पुलिस कार्रवाई और शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार पर तीखे सवाल उठाए। अपने संबोधन में गोगोई ने कहा कि देशभर में हुए छात्र प्रदर्शनों ने यह दिखाया कि युवा अपने भविष्य को लेकर गंभीर हैं और अपनी आवाज उठाने से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि केवल सख्त कानून बनाने से शिक्षा व्यवस्था मजबूत नहीं होगी, बल्कि व्यवस्था में पारदर्शिता और भरोसा पैदा करना भी जरूरी है। उनके भाषण के दौरान सदन में कई बार सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। इस बहस ने एंटी पेपर लीक बिल को लेकर राजनीतिक माहौल और गर्म कर दिया।
छात्र आंदोलन और पुलिस कार्रवाई का किया जिक्र
गौरव गोगोई ने अपने भाषण में हाल के छात्र आंदोलनों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदर्शन के दौरान कई छात्रों को चोटें आईं और कई घटनाओं ने पूरे देश का ध्यान खींचा। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन के दौरान पुलिस ने जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया। उन्होंने कहा कि कई छात्र अपने अधिकारों की मांग को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन उनके साथ हुई घटनाओं ने कई सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस सांसद ने कहा कि सरकार को छात्रों की बात सुननी चाहिए और उनकी समस्याओं का समाधान संवाद के जरिए निकालना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन करना नागरिकों का अधिकार है और ऐसे मामलों में संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई होनी चाहिए।
शिक्षा व्यवस्था और NTA को लेकर उठाए सवाल
अपने संबोधन में गौरव गोगोई ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि पहले से बने कानून और व्यवस्थाएं प्रभावी होतीं तो बार-बार पेपर लीक की घटनाएं सामने नहीं आतीं। उन्होंने आरोप लगाया कि केवल सजा बढ़ाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। उनके अनुसार, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और संस्थागत सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने सरकार से एनटीए में किए गए बदलावों और अधिकारियों की नियुक्तियों को लेकर भी जानकारी मांगी। गोगोई का कहना था कि छात्रों का भरोसा तभी लौटेगा, जब परीक्षा प्रणाली पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी दिखाई देगी। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार केवल कानून से नहीं, बल्कि प्रभावी प्रशासन और बेहतर संस्थागत ढांचे से संभव है।
10 घंटे चर्चा, सरकार और विपक्ष आमने-सामने
एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के लिए शुरुआत में छह घंटे का समय निर्धारित किया गया था, लेकिन विपक्ष की मांग के बाद चर्चा का समय बढ़ाकर 10 घंटे कर दिया गया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार इस महत्वपूर्ण विधेयक पर विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की सहमति से चर्चा का समय बढ़ाने की घोषणा की। बहस के दौरान सत्ता पक्ष ने बिल को परीक्षा प्रणाली में सुधार की दिशा में बड़ा कदम बताया, जबकि विपक्ष ने इसे पर्याप्त नहीं माना और कई संशोधनों की जरूरत बताई। अब इस विधेयक पर आगे की संसदीय प्रक्रिया और सरकार की प्रतिक्रिया पर सभी की नजर बनी हुई है।
