बिहार के भोजपुर जिले में हुए चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में सात दिन बाद बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। भरत तिवारी की मां की शिकायत पर पुलिस अधिकारियों और अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है। परिवार का आरोप है कि भरत ने सार्वजनिक रूप से आत्मसमर्पण करने की बात कही थी, लेकिन इसके बावजूद उसे गोली मारी गई। दूसरी ओर, शुरुआती पुलिस कार्रवाई में इसे मुठभेड़ बताया गया था। अब एफआईआर दर्ज होने के बाद पूरे मामले की जांच और भी अहम हो गई है।
परिवार का दावा- सरेंडर के बाद हुई फायरिंग
मृतक की मां आशा देवी ने अपनी शिकायत में गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके अनुसार, भरत तिवारी ने सोशल मीडिया पर लाइव आकर अपनी बात रखी थी और बाद में हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण कर दिया था। शिकायत में कहा गया है कि इसके बाद पुलिस ने उसे घेर लिया और गोली मार दी। परिवार का आरोप है कि घायल अवस्था में भरत को अपने साथ ले जाया गया और बाद में उसकी मौत की सूचना दी गई। शिकायत में संबंधित पुलिस अधिकारियों और मौके पर मौजूद अन्य कर्मियों की भूमिका की जांच की मांग की गई है। परिवार का कहना है कि उन्हें न्याय चाहिए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
पुलिस की कहानी पर उठते रहे सवाल
एनकाउंटर के तुरंत बाद पुलिस ने दावा किया था कि भरत तिवारी ने पुलिस टीम पर कई राउंड फायरिंग की थी, जिसके जवाब में कार्रवाई की गई। हालांकि घटना के बाद से ही पुलिस के इस दावे पर सवाल उठने लगे थे। विभिन्न रिपोर्टों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों में कई ऐसे बिंदु सामने आए, जिन्होंने पुलिस की कार्रवाई को लेकर संदेह पैदा किया। इसी बीच राज्य सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायिक जांच के आदेश दिए थे। साथ ही कुछ पुलिसकर्मियों को निलंबित भी किया गया था। अब हत्या की एफआईआर दर्ज होने के बाद यह मामला केवल मुठभेड़ तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि जांच एजेंसियों के सामने कई नए सवाल भी खड़े हो गए हैं।
जांच पर टिकी सबकी नजर, न्याय की मांग तेज
हत्या की एफआईआर दर्ज होने के बाद अब पूरे मामले की जांच नए सिरे से आगे बढ़ेगी। फिलहाल परिवार लगातार न्याय की मांग कर रहा है और दोषियों पर कार्रवाई की अपेक्षा जता रहा है। दूसरी ओर, प्रशासन का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। भरत तिवारी एनकाउंटर अब बिहार के सबसे चर्चित मामलों में शामिल हो चुका है और पूरे राज्य की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच में आखिर क्या सच सामने आता है।
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