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सावधान! दिल्ली में अब नहीं बिकेंगे पेट्रोल-डीजल वाले वाहन? जानें किस तारीख के बाद कचरा बन जाएंगी आपकी पुरानी गाड़ियां!

दिल्ली की नई EV पॉलिसी 2024-27 का ड्राफ्ट तैयार। जानें कब से बंद होंगे पेट्रोल-डीजल टेंपो और बाइक, और स्कूल बसों के लिए क्या हैं नए नियम। पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें।

Delhi EV Policy

Delhi EV Policy: दिल्ली की सड़कों पर शोर मचाते और धुआं छोड़ते वाहनों के दिन अब गिनती के रह गए हैं। अगर आप राजधानी में रहते हैं और नई बाइक या ऑटो खरीदने की सोच रहे हैं, तो यह खबर आपके होश उड़ा सकती है। दिल्ली सरकार ने अपनी बहुप्रतीक्षित ‘इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी’ (EV Policy) का नया ड्राफ्ट पेश कर दिया है, जो न केवल पर्यावरण को बचाने का दावा करता है, बल्कि पेट्रोल-डीजल गाड़ियों के शौकीनों के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है।

2027 से थमेगा टेंपो का पहिया

दिल्ली सरकार के नए ड्राफ्ट के अनुसार, राजधानी को ‘ईवी कैपिटल’ बनाने की दिशा में सबसे बड़ी गाज थ्री-व्हीलर्स और टू-व्हीलर्स पर गिरने वाली है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि साल 2027 के बाद दिल्ली में पेट्रोल, डीजल या सीएनजी से चलने वाले किसी भी नए थ्री-व्हीलर (टेंपो/ऑटो) का रजिस्ट्रेशन नहीं किया जाएगा। यानी, तीन साल बाद दिल्ली में केवल और केवल इलेक्ट्रिक ऑटो ही सड़कों पर उतर पाएंगे। इतना ही नहीं, जो लोग पेट्रोल बाइक या स्कूटी के दीवाने हैं, उनके लिए 2028 की डेडलाइन तय की गई है। 2028 के बाद दिल्ली में नई पेट्रोल बाइक खरीदना नामुमकिन हो जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि लोग धीरे-धीरे ई-स्कूटर और ई-बाइक की तरफ शिफ्ट हों, ताकि दोपहिया वाहनों से होने वाले भारी उत्सर्जन को शून्य पर लाया जा सके।

स्कूल बसों के लिए ‘30% का फॉर्मूला’

अक्सर यह सवाल उठता है कि प्रदूषण की मार झेलने वाली दिल्ली में स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य का क्या? सरकार ने इस बार स्कूलों के लिए भी सख्त लेकिन व्यावहारिक नियम बनाए हैं। नई नीति के तहत, साल 2030 तक दिल्ली के सभी स्कूलों को अपने कुल बस बेड़े का कम से कम 30% हिस्सा इलेक्ट्रिक बसों में तब्दील करना अनिवार्य होगा। इसका मतलब है कि अगर किसी स्कूल के पास 10 बसें हैं, तो उनमें से 3 का इलेक्ट्रिक होना जरूरी होगा। इसके साथ ही, सरकार ने ‘चैरिटी बिगिन्स एट होम’ की राह पकड़ते हुए घोषणा की है कि अब किसी भी सरकारी विभाग में नई डीजल या पेट्रोल गाड़ी नहीं खरीदी जाएगी। सभी सरकारी गाड़ियों को चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक मोड पर लाया जाएगा, जिससे जनता के बीच एक कड़ा संदेश जाए।

ई-बाइक और कारों पर लाखों की बचत

जहाँ एक तरफ पाबंदियां हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकार ने खजाना भी खोल दिया है। जो लोग अब इलेक्ट्रिक वाहन अपनाएंगे, उन्हें भारी सब्सिडी का लाभ मिलेगा। ड्राफ्ट के मुताबिक, अगर आप 2.5 लाख रुपये तक की ई-बाइक खरीदते हैं, तो पहले साल में आपको 30,000 रुपये तक की सीधी सब्सिडी मिल सकती है। कारों के मामले में भी सरकार मेहरबान है; पहली 10,000 इलेक्ट्रिक कारों की खरीद पर 50,000 रुपये की सब्सिडी दी जाएगी। मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए राहत की खबर यह है कि अगर आप 30 लाख रुपये से कम कीमत वाली हाइब्रिड गाड़ी खरीदते हैं, तो आपको रजिस्ट्रेशन शुल्क में 100% की छूट मिल सकती है। यह कदम उन लोगों के लिए है जो पूरी तरह इलेक्ट्रिक पर जाने से पहले हाइब्रिड का अनुभव लेना चाहते हैं।

प्रदूषण पर अंतिम प्रहार: क्या दिल्ली बनेगी ईवी हब?

दिल्ली सरकार ने इस ड्राफ्ट को अगले 30 दिनों के लिए आम जनता के सुझावों के लिए खुला रखा है। इस नीति का मूल उद्देश्य दिल्ली को दुनिया के सबसे स्वच्छ शहरों की सूची में शामिल करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली के प्रदूषण में 30% से अधिक योगदान वाहनों के धुएं का है। ऐसे में रजिस्ट्रेशन पर रोक और सब्सिडी का यह ‘कैरट एंड स्टिक’ (पुरस्कार और दंड) मॉडल एक क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है। हालांकि, चुनौती चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत करने की होगी।

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