ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव के बाद अब दोनों देशों के बीच बातचीत की कोशिशें तेज हो गई हैं। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में इस अहम वार्ता के लिए ईरान का प्रतिनिधिमंडल पहुंच चुका है। हालांकि ईरान ने साफ कर दिया है कि बातचीत तभी संभव है जब अमेरिका उसकी शर्तों को माने। इस बीच भारत में भी इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। बिहार के बीजेपी मंत्री राम कृपाल यादव ने इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि युद्ध का रुकना एक सकारात्मक कदम है और सभी देशों को मिलकर शांति स्थापित करने की दिशा में काम करना चाहिए।
युद्ध नहीं, संवाद जरूरी” — मंत्री का बड़ा संदेश
राम कृपाल यादव ने कहा कि किसी भी देश पर जबरदस्ती कोई फैसला थोपना सही नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हर मुद्दे का समाधान आपसी सहमति और संवाद से ही निकल सकता है। उनके मुताबिक, युद्ध हमेशा विनाशकारी होता है और इसका असर सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं रहता बल्कि पूरी दुनिया प्रभावित होती है। उन्होंने खाड़ी क्षेत्र में हुए संघर्षों का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसे युद्धों का आर्थिक और सामाजिक प्रभाव वैश्विक स्तर पर देखने को मिलता है। मंत्री ने उम्मीद जताई कि इस्लामाबाद में हो रही वार्ता से सकारात्मक परिणाम निकलेंगे और विश्व में शांति और भाईचारे का माहौल मजबूत होगा।
ट्रंप की चेतावनी पर तीखी प्रतिक्रिया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान ने हालात को और गंभीर बना दिया है, जिसमें उन्होंने कहा कि अगर बातचीत असफल रहती है तो ईरान पर फिर से हमला किया जा सकता है। इस पर राम कृपाल यादव ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान न केवल तनाव बढ़ाते हैं बल्कि शांति प्रयासों को भी कमजोर करते हैं। उनके अनुसार, जब दो देश बातचीत के लिए आगे बढ़ रहे हों, तब इस तरह की चेतावनियां माहौल को बिगाड़ सकती हैं। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और सकारात्मक सोच के साथ वार्ता को आगे बढ़ाने की अपील की।
देश की राजनीति पर भी दिया बड़ा बयान
अंतरराष्ट्रीय मुद्दों के साथ-साथ राम कृपाल यादव ने देश की राजनीति पर भी खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने नीतीश कुमार के राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने पर उन्हें बधाई दी और कहा कि उनका अनुभव राज्य और देश दोनों के लिए फायदेमंद साबित होगा। वहीं पश्चिम बंगाल की राजनीति को लेकर उन्होंने दावा किया कि वहां की जनता बदलाव चाहती है और आने वाले समय में सत्ता परिवर्तन संभव है। कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि इस तरह की टिप्पणियां गैर-जिम्मेदाराना हैं और नेताओं को अपने शब्दों का चयन सोच-समझकर करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष के कुछ नेताओं को एनडीए की मजबूती पच नहीं रही है।
