महाराष्ट्र में बाइक टैक्सी सेवाएं देने वाली कंपनियों के खिलाफ सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य के साइबर विभाग ने राइड-हेलिंग कंपनियों को लेकर गूगल और एप्पल को नोटिस जारी किया है। सरकार का आरोप है कि ये कंपनियां बिना जरूरी अनुमति और नियमों का पालन किए राज्य में बाइक टैक्सी सेवाएं चला रही थीं। इसी वजह से अब इन ऐप्स को ऐप स्टोर से हटाने और उनकी पहुंच बंद करने की मांग की गई है। इस कार्रवाई के बाद लाखों यूजर्स और ड्राइवर पार्टनर्स के बीच चिंता बढ़ गई है कि कहीं अचानक ये सेवाएं बंद न हो जाएं।
गूगल और एप्पल को दिया गया सख्त निर्देश
महाराष्ट्र सरकार के एडिशनल डायरेक्टर जनरल ऑफिस की तरफ से सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 79(3)(b) के तहत नोटिस जारी किया गया है। नोटिस में कहा गया है कि ये प्लेटफॉर्म बिना वैध सरकारी मंजूरी और परिवहन विभाग के नियमों का पालन किए यात्रियों को सेवा दे रहे हैं। सरकार ने साफ कहा है कि ऐप आधारित बाइक टैक्सी संचालन सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है। इसी वजह से कई एप्लीकेशन्स को हटाने के निर्देश दिए गए हैं। इतना ही नहीं, कंपनियों को चेतावनी भी दी गई है कि नियमों की अनदेखी करने पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
महिलाओं की सुरक्षा और ड्राइवर वेरिफिकेशन पर सवाल
सरकार की ओर से जारी नोटिस में सुरक्षा को सबसे बड़ा मुद्दा बताया गया है। अधिकारियों का कहना है कि बाइक टैक्सी सेवाओं में ड्राइवर वेरिफिकेशन सिस्टम पूरी तरह मजबूत नहीं है। साथ ही बीमा सुरक्षा, महिलाओं की सुरक्षा और इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम में भी कई खामियां पाई गई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कई मामलों में तेज रफ्तार और लापरवाही से बाइक चलाने की शिकायतें सामने आई हैं, जिससे यात्रियों और आम लोगों की सुरक्षा पर खतरा बढ़ा है। सरकार का मानना है कि अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो आगे बड़ी घटनाएं हो सकती हैं।
FIR दर्ज करने की तैयारी, कंपनियों पर बढ़ा दबाव
महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री Pratap Sarnaik ने साइबर विभाग को इन कंपनियों के खिलाफ FIR दर्ज करने और कानूनी कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और सख्ती देखने को मिल सकती है। अगर सरकार का आदेश लागू होता है तो राज्य में लाखों लोग प्रभावित हो सकते हैं, क्योंकि रोजाना बड़ी संख्या में लोग बाइक टैक्सी सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि गूगल और एप्पल इस नोटिस पर क्या कदम उठाते हैं और कंपनियां सरकार की शर्तों को मानती हैं या नहीं।
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