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“मैं ही बनता कांग्रेस अध्यक्ष, लेकिन…” अशोक गहलोत ने खोल दिया राजनीति का सबसे बड़ा ‘सीक्रेट’, बिना नाम लिए किस पर दागे तीर?

क्या अशोक गहलोत की पीठ में अपनों ने ही छुरा घोंपा? कांग्रेस अध्यक्ष पद की रेस से बाहर होने को लेकर गहलोत ने किया 'साजिश' का सनसनीखेज दावा।

अशोक गहलोत

राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर ऐसा भूचाल आया है, जिसकी गूंज जयपुर से लेकर दिल्ली में बैठे कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व तक सुनाई दे रही है। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के सबसे कद्दावर नेताओं में शुमार अशोक गहलोत ने एक ऐसा बयान दे दिया है, जिसने पार्टी के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान को सरेआम उजागर कर दिया है। गहलोत ने पत्रकारों से बातचीत में बेहद गंभीर और हैरान करने वाला दावा किया कि वे आज कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष होते, लेकिन उनके खिलाफ एक गहरी साजिश रची गई। उन्होंने खुलकर कहा कि जब खुद सोनिया गांधी ने उन्हें इस सर्वोच्च पद की जिम्मेदारी संभालने का प्रस्ताव दिया था, तो भला वे इसके लिए क्यों मना करते? राजनीति के ‘जादूगर’ कहे जाने वाले गहलोत के इस बयान ने यह साफ कर दिया है कि साल 2022 के अध्यक्ष चुनाव के दौरान परदे के पीछे कुछ ऐसा घटा था, जिसकी टीस आज भी उनके दिल में बरकरार है। हालांकि, इस पूरे बयान में उन्होंने किसी भी बड़े नेता का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया, जिससे सस्पेंस और ज्यादा गहरा गया है।

भीतरघात का इशारा: आखिर कौन था वो जिसने बिगाड़ा पूरा खेल?

अशोक गहलोत के इस बयान के बाद अब सियासी गलियारों में यह कयासबाजी तेज हो गई है कि आखिर वह ‘अदृश्य हाथ’ किसका था, जिसने उन्हें दिल्ली की गद्दी पर बैठने से रोक दिया। गौरतलब है कि सितंबर 2022 में जब कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव होना था, तब गहलोत का नाम सबसे आगे चल रहा था। लेकिन ऐन वक्त पर जयपुर में गहलोत गुट के विधायकों ने एक समानांतर बैठक बुलाकर आलाकमान के पर्यवेक्षकों को चुनौती दे दी थी, जिसके बाद मल्लिकार्जुन खड़गे को अध्यक्ष बनाया गया। अब गहलोत का यह कहना कि “मेरे साथ साजिश हुई”, सीधे तौर पर कांग्रेस के ही कुछ बड़े सिपहसालारों की तरफ इशारा करता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गहलोत इस बयान के जरिए यह संदेश देना चाहते हैं कि आलाकमान के सामने उनकी छवि को जानबूझकर धूमिल किया गया। बिना नाम लिए किया गया यह हमला राजस्थान कांग्रेस में आने वाले दिनों में एक नए सियासी दंगल की शुरुआत कर सकता है।

मानेसर कांड और पायलट गुट पर रुख: ‘अपनों’ को लेकर नरम पड़े ‘जादूगर’ के सुर

इस सनसनीखेज दावे के साथ ही अशोक गहलोत ने राजस्थान कांग्रेस की सबसे बड़ी दुखती रग यानी ‘मानेसर कांड’ का भी जिक्र किया। साल 2020 में सचिन पायलट और उनके समर्थक विधायकों की बगावत को याद करते हुए गहलोत ने इस बार हैरान करने वाली नरमी दिखाई। उन्होंने कहा कि विरोधी लोग बार-बार मानेसर को लेकर उन पर तंज कसते हैं, लेकिन यह पूरी तरह से उनके घर का आपसी मामला है। गहलोत ने सचिन पायलट, गोविंद सिंह डोटासरा, टीकाराम जूली, सीपी जोशी और भंवर जितेंद्र सिंह जैसे दिग्गजों का नाम लेते हुए कहा कि वे सभी एक हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि पार्टी के भीतर जो भी गलतफहमियां या मतभेद हैं, उन्हें आपस में बैठकर टेबल पर दूर कर लिया जाएगा। गहलोत का यह बदला हुआ अंदाज यह संकेत देता है कि वे राज्य में अपनी पकड़ को कमजोर नहीं होने देना चाहते और सभी गुटों को साथ लेकर चलने की रणनीति अपना रहे हैं।

हाईकमान से वफादारी का दम: ‘सच्चाई कभी छिप नहीं सकती’

अपने संबोधन के आखिरी हिस्से में अशोक गहलोत ने गांधी परिवार के प्रति अपनी अटूट निष्ठा और वफादारी का प्रदर्शन किया। 25 सितंबर की घटना का बचाव करते हुए उन्होंने साफ किया कि राजस्थान कांग्रेस कभी भी केंद्रीय नेतृत्व या हाईकमान के खिलाफ बगावत करने की सोच भी नहीं सकती। इतिहास के पन्नों को पलटते हुए उन्होंने याद दिलाया कि साल 1978 में जब इंदिरा गांधी ने नई कांग्रेस का गठन किया था, तब राजस्थान के नेता उनके समर्थन में जेल तक गए थे। गहलोत ने भावुक होते हुए कहा कि इंदिरा जी, सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने हमेशा राजस्थान कांग्रेस पर अटूट भरोसा जताया है और यह भरोसा आज भी कायम है। उन्होंने अपनी बात खत्म करते हुए कहा कि सच्चाई का कोई दूसरा विकल्प नहीं होता, और उन्होंने अपनी सच्चाई जनता के सामने रख दी है। अब देखना यह होगा कि दिल्ली दरबार गहलोत के इस ‘साजिश’ वाले दांव को किस तरह लेता है।

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