शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन की तस्वीर तेजी से बदलती हुई नजर आ रही है। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों और आम लोगों से शांति बनाए रखते हुए अपने-अपने घर वापस लौटने की सख्त अपील की है। पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस्तीफे की आधिकारिक घोषणा के बाद से ही जंतर-मंतर पर जुटी भीड़ में भारी कमी दर्ज की गई है। बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी अपने घरों के लिए रवाना हो चुके हैं, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने भी राहत की सांस ली है।
दिल्ली मेट्रो के खुले तीन मुख्य स्टेशन
छात्र आंदोलन और सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) द्वारा बंद किए गए 18 स्टेशनों में से अब धीरे-धीरे सामान्य स्थिति बहाल की जा रही है। एहतियात के तौर पर बंद किए गए राजीव चौक, मंडी हाउस और सेंट्रल सेक्रेटेरिएट जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण मेट्रो स्टेशनों के एंट्री गेट दोबारा खोल दिए गए हैं। इन बड़े स्टेशनों के खुलने से आम यात्रियों और दफ्तर जाने वाले लोगों को आवाजाही में बहुत बड़ी राहत मिली है। प्रशासन का मानना है कि शहर की रफ्तार अब धीरे-धीरे पूरी तरह पटरी पर लौट रही है।
संविधान क्लब में शुरू हुआ बैठकों का दौर
भले ही जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों की संख्या कम हो गई हो, लेकिन यह आंदोलन पूरी तरह से खत्म होता हुआ दिखाई नहीं दे रहा है। शुक्रवार को हुई शुरुआती बैठक के बेनतीजा रहने के बाद, अब संविधान क्लब में सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत का नया और अहम दौर शुरू हो चुका है। चर्चा को आगे बढ़ाने के लिए CJP की ओर से आशुतोष रांका और सौरव दास संविधान क्लब पहुंचे, जहां उनका स्वागत करने के लिए केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह भी मौजूद रहे। इस हाई-प्रोफाइल बैठक पर देश भर की निगाहें टिकी हुई हैं।
एक तरफ पुलिस की अपील, तो दूसरी तरफ समाधान की तलाश जारी
वर्तमान परिस्थितियों को देखें तो राजधानी में दोहरी स्थिति बनी हुई है। एक तरफ जहां दिल्ली पुलिस लगातार प्रदर्शनकारियों से अपील कर रही है कि वे शांतिपूर्वक अपने घरों को लौट जाएं, वहीं दूसरी तरफ बंद कमरे में चल रही बैठकों के जरिए बचे हुए मुद्दों का स्थायी समाधान तलाशने की कोशिशें जारी हैं। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि जब तक सरकार और आंदोलनकारियों के बीच सभी बिंदुओं पर सहमति नहीं बन जाती, तब तक तनाव के पूरी तरह टलने की उम्मीद कम ही है। आने वाले कुछ घंटों में इस बैठक से कोई बड़ा फैसला सामने आ सकता है।
