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‘भारत ने नेपाल की…’, पीएम बालेन शाह के जिस बयान से मचा हड़कंप, अब विदेश मंत्रालय ने खोला उसका असली राज!

नेपाल के पीएम बालेन शाह के संसद में भारत-नेपाल जमीन कब्जे वाले बयान पर मचे बवाल के बाद अब नेपाल के विदेश मंत्रालय की बड़ी सफाई सामने आई है। जानिए क्या है पूरी सच्चाई।

बालेन शाह

नेपाल के राजनीतिक गलियारों से लेकर भारतीय सीमा तक इस समय एक बयान को लेकर भारी हलचल मची हुई है। हाल ही में नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने संसद में एक ऐसा बयान दे दिया, जिसने दोनों देशों के कूटनीतिक रिश्तों में खलबली मचा दी। पीएम शाह ने कहा था कि उन्हें पद संभालने के बाद पता चला कि सिर्फ भारत ने ही नहीं, बल्कि नेपाल ने भी कई जगहों पर भारतीय जमीन पर कब्जा कर रखा है। इस बयान के सामने आते ही नेपाल से लेकर भारत तक विवाद खड़ा हो गया और लोग इस ‘कब्जे’ की असलियत जानने के लिए बेचैन हो उठे। चौतरफा घिरने और तीखी आलोचना के बाद आखिरकार अब नेपाल के विदेश मंत्रालय को इस पर अपनी चुप्पी तोड़नी पड़ी है।

विदेश मंत्रालय की सफाई: ‘कब्जा’ नहीं, यह है ‘नो-मैन्स-लैंड’ का तकनीकी खेल

मामले को बिगड़ता देख नेपाल के विदेश मंत्रालय ने रविवार को एक आधिकारिक बयान जारी कर प्रधानमंत्री की बातों का असली मतलब समझाया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लोक बहादुर पौडेल छेत्री ने साफ किया कि प्रधानमंत्री बालेन शाह के बयान को गलत संदर्भ में लिया गया। उनका इरादा किसी नए इलाके पर दावा ठोकने का बिल्कुल नहीं था। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह पूरा मामला दरअसल ‘दसगजा एरिया’ यानी नो-मैन्स-लैंड (No Man’s Land) में हुए अतिक्रमण और क्रॉस-बॉर्डर जमीन के इस्तेमाल से जुड़ा हुआ है।

नदियों के बदलते रुख ने उलझाया सीमा का गणित

नेपाल सरकार के मुताबिक, नदी वाले सीमावर्ती इलाकों में भारत और नेपाल के बीच ‘फिक्स्ड बाउंड्री सिद्धांत’ (Fixed Boundary Principle) लागू होता है। सालों से नदियों के बहाव और रास्तों में बदलाव होने के कारण सीमा का तकनीकी गणित काफी उलझ गया है। इसके चलते ऐसी परिस्थितियां पैदा हो गई हैं जहाँ एक देश के नागरिक अनजाने में दूसरे देश के अधिकार क्षेत्र में आने वाली जमीन पर खेती कर रहे हैं या रह रहे हैं। टेक्निकल कमेटी की स्टडी का हवाला देते हुए मंत्रालय ने बताया कि तकनीकी रूप से नेपाल के नियंत्रण वाली कुछ जमीन भारतीय हिस्से में हो सकती है, और ठीक इसी तरह भारत के नियंत्रण वाली कुछ जमीन नेपाली हिस्से में आ सकती है। पीएम शाह संसद में इसी तकनीकी सच्चाई का जिक्र कर रहे थे।

डिप्लोमेसी से सुलझेंगे लिपुलेख और कालापानी जैसे बड़े विवाद

संसद के इसी सत्र के दौरान प्रधानमंत्री बालेन शाह ने भारत के साथ मजबूत रिश्तों की वकालत भी की। उन्होंने जोर देकर कहा कि दोनों देशों को सीमा से जुड़े तमाम पुराने और नए मुद्दों पर बैठकर गंभीर चर्चा करनी चाहिए। शाह ने साफ किया कि लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी जैसे संवेदनशील सीमा विवादों को किसी टकराव के बजाय पूरी तरह से डिप्लोमैटिक यानी राजनयिक बातचीत के जरिए सुलझाया जाएगा। विदेश मंत्रालय की इस विस्तृत सफाई के बाद अब इस पूरे विवाद के शांत होने की उम्मीद जताई जा रही है।

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