अग्निवीर योजना को लेकर केंद्र सरकार के नए फैसले पर बीजेपी नेता बृजभूषण शरण सिंह ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने अग्निवीरों का कार्यकाल दो साल बढ़ाने के फैसले का स्वागत करते हुए इसे देश और युवाओं के हित में बताया। बृजभूषण सिंह का मानना है कि मौजूदा समय में सेना की जरूरतों और बदलते युद्ध के हालात को देखते हुए युवाओं को सैन्य प्रशिक्षण देना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में हर युवा को तीन से चार साल की सैन्य ट्रेनिंग मिलनी चाहिए। उनके मुताबिक, इससे युवा शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत होंगे और जरूरत पड़ने पर देश की सुरक्षा में योगदान दे सकेंगे।
रूस की तरह भारत में भी हर युवा को मिले सैन्य प्रशिक्षण
बृजभूषण शरण सिंह ने रूस समेत कई देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां युवाओं को स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद कुछ वर्षों तक सैन्य प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके बाद वे अपनी पसंद के अनुसार मेडिकल, इंजीनियरिंग या दूसरे क्षेत्रों में करियर बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारत में भी ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे हर युवा सैनिक की तरह प्रशिक्षित हो सके। उनके अनुसार, अग्निवीर योजना के पीछे भी युवाओं को अनुशासित, स्वस्थ और देश की सुरक्षा के लिए तैयार करने की सोच रही होगी। उन्होंने कहा कि अग्निवीरों का कार्यकाल दो साल बढ़ाने का फैसला स्वागतयोग्य है। इससे युवाओं में सेना में भर्ती होने का उत्साह बढ़ेगा और अधिक संख्या में युवा इसकी तैयारी करेंगे। सरकार के फैसले के तहत पात्रता शर्तें पूरी करने और सहमति देने वाले अग्निवीरों को आगे स्थायी भर्ती का अवसर भी मिल सकेगा।
जनसंख्या नियंत्रण पर बोले- सामाजिक और जातिगत संतुलन भी जरूरी
अग्निवीर योजना के अलावा बीजेपी नेता ने जनसंख्या नियंत्रण के मुद्दे पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि यदि सरकार दो या तीन बच्चों की सीमा तय करती है तो इसका पालन नहीं करने वालों के संबंध में गंभीरता से विचार करना होगा। हालांकि, उन्होंने इस मुद्दे पर सामाजिक और जातिगत संतुलन बनाए रखने की जरूरत भी बताई। बृजभूषण सिंह के मुताबिक, भारत में चुनावी राजनीति और प्रतिनिधित्व में जातीय संख्या का प्रभाव दिखाई देता है। राजनीतिक दल टिकट देने और मंत्री पद तय करने में भी सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हैं। ऐसे में जनसंख्या नियंत्रण से जुड़े किसी भी कानून को लागू करते समय सभी वर्गों के हितों पर विचार करना जरूरी है। उन्होंने आगाह किया कि ऐसा कोई फैसला नहीं होना चाहिए जिससे किसी समाज या वर्ग का राजनीतिक और सामाजिक अस्तित्व प्रभावित हो। उनका कहना है कि जनसंख्या नियंत्रण जरूरी है, लेकिन इसके साथ सामाजिक संतुलन बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
