Digvijay Singh Controversy: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह एक बार फिर अपने बयान को लेकर राजनीतिक विवाद में घिर गए हैं। उन्होंने हिंदुत्व को लेकर ऐसी टिप्पणी कर दी, जिस पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। दिग्विजय सिंह ने कहा कि सनातन धर्म सभी धर्मों का सम्मान करना सिखाता है, जबकि नफरत फैलाने को हिंदुत्व से जोड़ा। उनके इस बयान के बाद मध्य प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। भाजपा नेता विश्वास कैलाश सारंग ने कांग्रेस नेता पर सनातन धर्म को बदनाम करने का आरोप लगाया है।
दिग्विजय सिंह ने हिंदुत्व को लेकर क्या कहा?
मध्य प्रदेश के गुना जिले में अपनी पदयात्रा के दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा कि सनातन धर्म पूरी दुनिया के कल्याण और सभी धर्मों के सम्मान की बात करता है। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS), विश्व हिंदू परिषद और सावरकर का जिक्र करते हुए हिंदुत्व पर टिप्पणी की। उनके इस बयान के सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है।
भाजपा नेता विश्वास सारंग ने किया पलटवार
दिग्विजय सिंह के बयान पर मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता अपनी यात्रा के जरिए समाज में बंटवारे की राजनीति कर रहे हैं। सारंग ने कहा कि दिग्विजय सिंह ने हिंदुत्व और सनातन धर्म को बदनाम करने की जिम्मेदारी उठा रखी है। उन्होंने कांग्रेस नेता पर हिंदू देवी-देवताओं और धार्मिक भावनाओं को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां करने का भी आरोप लगाया।
जाकिर नाइक का जिक्र कर भी साधा निशाना
भाजपा नेता ने दिग्विजय सिंह पर हमला बोलते हुए जाकिर नाइक का भी जिक्र किया। सारंग ने सवाल उठाया कि कांग्रेस नेता को हिंदू धर्म में कमियां क्यों दिखाई देती हैं। उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह की यात्रा समाज को जोड़ने के बजाय विभाजित करने का काम कर रही है। इस बयान के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी टकराव और बढ़ने के आसार हैं।
उज्जैन से अयोध्या तक क्यों निकाली जा रही है यात्रा?
दरअसल, दिग्विजय सिंह ने विजयादशमी के अवसर पर उज्जैन से ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ शुरू की है। यह पदयात्रा करीब 930 किलोमीटर की दूरी तय करके अयोध्या पहुंचेगी। यात्रा का उद्देश्य सनातन धर्म के मूल सिद्धांतों, सत्य और पारदर्शिता का संदेश देना बताया गया है। इस दौरान धार्मिक स्थलों पर चढ़ावे की पारदर्शिता, धन के कथित दुरुपयोग की जांच और वोट चोरी जैसे मुद्दे भी उठाए जा रहे हैं। अब इस यात्रा के दौरान दिए गए बयान ने राजनीतिक विवाद को नया मोड़ दे दिया है।
