सोमवार को शेयर बाजार की शुरुआत ने निवेशकों को चौंका दिया। जैसे ही बाजार खुला, बिकवाली का ऐसा दबाव बना कि कुछ ही मिनटों में इंडेक्स तेज गिरावट में आ गए। BSE Sensex करीब 1,474 अंकों की गिरावट के साथ 73,000 के स्तर के आसपास आ गया, जबकि Nifty 50 भी 400 अंकों से ज्यादा टूटकर 22,600 के पास पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में ही बाजार में घबराहट का माहौल साफ दिखा, जहां लगभग सभी सेक्टर्स में लाल निशान नजर आया। बैंकिंग, आईटी और मेटल शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव देखा गया, जिससे निवेशकों के करोड़ों रुपये कुछ ही पलों में साफ हो गए।
मिडिल ईस्ट तनाव बना गिरावट की बड़ी वजह
इस भारी गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव माना जा रहा है। Middle East में लगातार बढ़ रहे टकराव और संभावित युद्ध की आशंकाओं ने वैश्विक बाजारों को पहले ही हिला दिया था, जिसका असर अब भारत में भी देखने को मिला। खासकर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने चिंता और बढ़ा दी है। भारत जैसे देश, जो तेल आयात पर काफी निर्भर हैं, उनके लिए यह स्थिति आर्थिक दबाव पैदा करती है। निवेशकों को डर है कि अगर हालात और बिगड़े, तो महंगाई बढ़ सकती है और कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है।
वैश्विक बाजारों में भी हाहाकार, बढ़ी अनिश्चितता
भारतीय बाजार में आई इस गिरावट का असर अकेले नहीं है, बल्कि दुनिया भर के बाजारों में भी इसी तरह की कमजोरी देखने को मिल रही है। अमेरिका, यूरोप और एशिया के कई प्रमुख बाजारों में पहले से ही गिरावट का दौर चल रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निवेशक जोखिम से बचने के लिए सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। इस माहौल में विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी बढ़ गई है, जिससे भारतीय बाजार पर और दबाव पड़ा है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक वैश्विक हालात स्थिर नहीं होते, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
निवेशकों के लिए क्या है आगे की रणनीति?
इस तरह की तेज गिरावट के बीच निवेशकों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि अब क्या किया जाए। जानकारों का मानना है कि घबराकर फैसले लेने से नुकसान और बढ़ सकता है। लंबी अवधि के निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो पर ध्यान देना चाहिए और मजबूत कंपनियों में बने रहना चाहिए। वहीं, शॉर्ट टर्म निवेशकों के लिए सतर्क रहना जरूरी है, क्योंकि बाजार में अभी और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। विशेषज्ञ यह भी सलाह दे रहे हैं कि वैश्विक संकेतों, खासकर तेल की कीमतों और मिडिल ईस्ट की स्थिति पर नजर रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि यही आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करेंगे।
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