तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर चल रहा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। ममता बनर्जी के गुट ने चुनाव आयोग के अंतरिम फैसले को चुनौती दी है। सोमवार को वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत में इस मामले का जिक्र करते हुए जल्द सुनवाई की मांग रखी। चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने मामले को जल्द सूचीबद्ध करने का भरोसा दिया। यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब पश्चिम बंगाल की दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की प्रक्रिया चल रही है।
चुनाव आयोग के आदेश पर सिब्बल ने उठाए सवाल
सुप्रीम कोर्ट में मामले का उल्लेख करते हुए कपिल सिब्बल ने बताया कि चुनाव आयोग ने पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह से जुड़े विवाद पर जून में सुनवाई शुरू की थी। ममता बनर्जी के पक्ष ने जुलाई में आयोग के सामने अपना जवाब भी दाखिल किया था। सिब्बल के अनुसार, इसके बाद काफी समय तक आयोग की ओर से कोई फैसला नहीं आया और उपचुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद अंतरिम आदेश दे दिया गया। उन्होंने अदालत से इस फैसले पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। हालांकि, CJI ने कहा कि मामले की सुनवाई के दौरान दूसरे पक्ष को भी अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिलेगा।
दोनों गुटों को मिले अलग नाम और चिन्ह
TMC के नाम, संगठन और चुनाव चिन्ह पर दो पक्षों के बीच विवाद चल रहा है। इसी मामले में चुनाव आयोग ने 17 सितंबर को अंतरिम व्यवस्था लागू की। आयोग के आदेश के बाद दोनों गुटों को पार्टी के पुराने नाम और पारंपरिक चुनाव चिन्ह का इस्तेमाल करने से रोक दिया गया। ममता बनर्जी के गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम के साथ ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिन्ह दिया गया है। वहीं दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिन्ह मिला है। यह व्यवस्था फिलहाल आगामी उपचुनावों को ध्यान में रखते हुए लागू की गई है। अब इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर सबकी नजर रहेगी।
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