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जिस सच को पाकिस्तान छिपाता रहा, वही मंच से सच उगल गया आतंकी! लश्कर कमांडर के बयान से हिल गया रावलपिंडी

Pakistan Terrorism पर बड़ा खुलासा, लश्कर-ए-तैयबा के डिप्टी चीफ सैफुल्लाह कसूरी ने खुले मंच से पाकिस्तानी सेना से रिश्तों को स्वीकार किया, वायरल वीडियो ने आतंक और सेना की सांठगांठ की पोल खोली।

पाकिस्तान और आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के बीच रिश्तों को लेकर वर्षों से भारत आरोप लगाता रहा है, लेकिन अब वही बात खुद लश्कर के बड़े आतंकी ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार कर ली है। लश्कर-ए-तैयबा के डिप्टी चीफ सैफुल्लाह कसूरी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह खुले मंच से यह कहता नजर आ रहा है कि पाकिस्तानी सेना उसे अपने कार्यक्रमों में बुलाती है। कसूरी का दावा है कि उसे न सिर्फ सेना के आयोजनों में आमंत्रण मिलता है, बल्कि पाकिस्तानी सैनिकों की अंतिम संस्कार की नमाज पढ़ाने के लिए भी बुलाया जाता है। यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर खुद को आतंकवाद के खिलाफ लड़ने वाला देश बताता रहा है। कसूरी का यह कबूलनामा उन सभी दावों को कमजोर करता है और यह संकेत देता है कि आतंकियों और सेना के बीच रिश्ता केवल आरोप नहीं, बल्कि एक सुनियोजित सच्चाई है। वीडियो में कसूरी बिना किसी डर या संकोच के यह बात कहता है, जिससे साफ जाहिर होता है कि पाकिस्तान में आतंकी संगठनों को किस स्तर तक संरक्षण मिला हुआ है।

स्कूल के मंच से बोला आतंकी

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सैफुल्लाह कसूरी ने यह बयान किसी गुप्त बैठक में नहीं, बल्कि एक स्कूल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान दिया। बच्चों को संबोधित करते हुए उसने कहा कि पाकिस्तानी सेना उसे औपचारिक न्योता भेजती है और वह गर्व से उन कार्यक्रमों में शामिल होता है। जिस देश में बच्चों को आतंकवाद के खिलाफ जागरूक किया जाना चाहिए, वहीं एक कुख्यात आतंकी खुलेआम अपने सेना से रिश्तों की डींगें मार रहा है। यह दृश्य पाकिस्तान की आंतरिक स्थिति और वहां के तथाकथित कानून-व्यवस्था की सच्चाई को उजागर करता है। कसूरी का यह बयान न केवल पाकिस्तान सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े करता है, बल्कि सेना प्रमुख आसिम मुनीर की भूमिका पर भी गंभीर संदेह पैदा करता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने पाकिस्तान यह दिखाने की कोशिश करता है कि वह आतंक के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है, लेकिन ऐसे वीडियो यह साबित करते हैं कि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। आतंकी का यह आत्मविश्वास बताता है कि उसे किसी तरह का डर नहीं है और वह जानता है कि उसे सत्ता के ताकतवर हिस्सों का संरक्षण प्राप्त है।

भारत को धमकी और ऑपरेशन सिंदूर पर बौखलाहट

सैफुल्लाह कसूरी का बयान केवल पाकिस्तान सेना से रिश्तों तक सीमित नहीं रहा। उसने भारत को लेकर भी भड़काऊ और धमकी भरे शब्दों का इस्तेमाल किया। कसूरी ने दावा किया कि भारत उससे डरता है और उसने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर भी विवादित टिप्पणी की। उसने स्वीकार किया कि भारत के इस ऑपरेशन में पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में मौजूद आतंकी ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा, लेकिन साथ ही यह कहने की कोशिश की कि भारत ने गलती की है। कसूरी ने दोहराया कि लश्कर-ए-तैयबा कश्मीर को लेकर अपने एजेंडे से पीछे नहीं हटेगा। उसका यह बयान साफ दिखाता है कि ऑपरेशन सिंदूर से आतंकी नेटवर्क को गहरी चोट पहुंची है, जिससे वे बौखलाए हुए हैं। भारत की सैन्य कार्रवाई ने यह संदेश दिया कि आतंक के खिलाफ अब सिर्फ बयान नहीं, बल्कि ठोस जवाब दिया जाएगा। कसूरी के शब्दों में छिपी बेचैनी इस बात का सबूत है कि आतंकी संगठन भारत की रणनीति से दबाव में हैं।

पहलगाम हमले पर घमंड और ऑपरेशन सिंदूर की पूरी कहानी

सैफुल्लाह कसूरी इससे पहले भी अपने बयानों को लेकर विवादों में रहा है। एक रैली के दौरान उसने खुद को पहलगाम आतंकी हमले का मास्टरमाइंड बताए जाने पर गर्व जताया था। उसने कहा था कि इस आरोप के बाद उसका नाम पूरी दुनिया में मशहूर हो गया है। गौरतलब है कि 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की जान चली गई थी, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। इसी हमले के जवाब में भारत ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत की थी। इस ऑपरेशन के तहत पाकिस्तान और पीओके में मौजूद आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। इसके बाद चार दिनों तक दोनों देशों के बीच ड्रोन और मिसाइल हमलों का दौर चला, जिससे क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया। आखिरकार 10 मई को भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष रोकने पर सहमति बनी। कसूरी के ताजा बयान ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि पाकिस्तान में आतंकवाद केवल बाहरी समस्या नहीं, बल्कि राज्य के भीतर पनपाई गई एक रणनीति का हिस्सा है, जिसका खामियाजा निर्दोष लोग भुगतते हैं।

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