अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इस बीच चीन ने खुलकर अपनी चिंता जाहिर की है और साफ शब्दों में कहा है कि सैन्य कार्रवाई किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकती। संयुक्त राष्ट्र में चीन के स्थायी प्रतिनिधि फू कोंग ने सुरक्षा परिषद की बैठक में कहा कि हालात बेहद गंभीर हैं और अगर तुरंत युद्ध नहीं रोका गया तो इसका असर पूरे क्षेत्र ही नहीं बल्कि दुनिया पर पड़ सकता है। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और बातचीत का रास्ता अपनाने की अपील की। चीन का कहना है कि किसी भी देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए और हिंसा से केवल अस्थिरता बढ़ती है।
हमले के बाद बढ़ा तनाव, जवाबी कार्रवाई का खतरा
हालिया घटनाओं में अमेरिका और इज़राइल की ओर से ईरान के ठिकानों पर हमले किए गए, जिसके बाद हालात और बिगड़ गए। ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई के संकेत दिए हैं। क्षेत्र में सुरक्षा अलर्ट बढ़ा दिया गया है और कई देशों ने अपने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। जानकारों का कहना है कि यदि यह टकराव लंबा खिंचता है तो इसका असर तेल आपूर्ति, वैश्विक व्यापार और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर पड़ सकता है। पहले से ही कई एयरलाइंस ने अपने रूट बदल दिए हैं। मिडिल ईस्ट दुनिया के ऊर्जा बाजार का अहम केंद्र है, इसलिए यहां किसी भी तरह की अस्थिरता वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती है।
दुनिया भर में शांति की अपील, कूटनीति पर जोर
चीन के अलावा रूस और कई यूरोपीय देशों ने भी शांति की अपील की है। उनका कहना है कि अगर समय रहते बातचीत शुरू नहीं हुई तो हालात नियंत्रण से बाहर हो सकते हैं। संयुक्त राष्ट्र में लगातार बैठकों का दौर जारी है, जहां सदस्य देश युद्धविराम की संभावना तलाश रहे हैं। चीन ने कहा है कि सभी देशों को अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करना चाहिए और किसी भी प्रकार की एकतरफा सैन्य कार्रवाई से बचना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय सबसे बड़ी जरूरत विश्वास बहाली और संवाद की है। यदि कूटनीतिक प्रयास तेज किए जाएं तो हालात को बिगड़ने से रोका जा सकता है।
आगे क्या? दुनिया की नजरें महाशक्तियों के फैसलों पर
अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर हैं कि आगे अमेरिका, इज़राइल और ईरान क्या कदम उठाते हैं। क्या बातचीत शुरू होगी या तनाव और बढ़ेगा? चीन ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह क्षेत्र में शांति बनाए रखने के पक्ष में है और किसी भी बड़े युद्ध से बचना चाहता है। आने वाले दिन बेहद अहम साबित हो सकते हैं। यदि समझदारी से काम नहीं लिया गया तो यह संघर्ष व्यापक रूप ले सकता है। फिलहाल वैश्विक समुदाय यही उम्मीद कर रहा है कि बातचीत के जरिए समाधान निकले और मिडिल ईस्ट में शांति बहाल हो सके।
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