अमेरिका में मिडटर्म चुनाव के नतीजों पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। इन चुनावों का असर सिर्फ अमेरिकी राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर भी पड़ सकता है। शुरुआती रुझानों में डेमोक्रेटिक पार्टी बढ़त बनाती नजर आ रही है, जबकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की रिपब्लिकन पार्टी को चुनौती मिल रही है। इन नतीजों से तय होगा कि ट्रंप अपने कार्यकाल के बचे दो साल में कितनी आसानी से फैसले ले पाएंगे। अमेरिकी संसद के दोनों सदनों यानी प्रतिनिधि सभा और सीनेट पर किस पार्टी का नियंत्रण होगा, यही इस चुनाव का सबसे बड़ा सवाल है।
डेमोक्रेट्स जीते तो ट्रंप की बढ़ सकती हैं मुश्किलें
अगर डेमोक्रेटिक पार्टी प्रतिनिधि सभा में बहुमत हासिल कर लेती है तो ट्रंप प्रशासन के लिए कई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। विपक्षी पार्टी को संसदीय समितियों का नियंत्रण मिलने से सरकार के फैसलों की जांच करने और अधिकारियों को पूछताछ के लिए बुलाने की ताकत मिलेगी।
दोनों सदनों पर कब्जा हुआ तो राष्ट्रपति की बढ़ेगी परेशानी
डेमोक्रेट्स अगर प्रतिनिधि सभा के साथ सीनेट में भी बहुमत हासिल कर लेते हैं तो ट्रंप की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। सीनेट में राष्ट्रपति की ओर से की जाने वाली कई अहम नियुक्तियों को मंजूरी दी जाती है। ऐसे में डेमोक्रेट्स कैबिनेट सदस्यों, राजदूतों और न्यायिक नियुक्तियों के मामलों में अड़चन पैदा कर सकते हैं। हालांकि, बड़े कानूनों को पास कराने के लिए राजनीतिक सहमति जरूरी होगी। विपक्ष महंगाई, स्वास्थ्य सेवाओं, आवास और गर्भपात जैसे मुद्दों पर भी सरकार को घेर सकता है।
रिपब्लिकन जीते तो ट्रंप को मिलेगी बड़ी राहत
अगर रिपब्लिकन पार्टी दोनों सदनों में अपना बहुमत बरकरार रखती है तो ट्रंप के लिए अगले दो साल काफी आसान हो सकते हैं। उनकी सरकार को कानून पास कराने, बजट से जुड़े फैसले लेने और अहम पदों पर नियुक्तियां कराने में ज्यादा समर्थन मिलेगा।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था से लेकर दुनिया की राजनीति पर पड़ेगा असर
मिडटर्म चुनाव का असर अमेरिका की अर्थव्यवस्था और वैश्विक बाजारों पर भी देखने को मिल सकता है। बजट, सरकारी खर्च और कर्ज की सीमा को लेकर दोनों पार्टियों के बीच टकराव बढ़ने पर वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता पैदा हो सकती है। वहीं, ट्रंप की टैरिफ नीति और विदेश नीति पर भी संसद के नियंत्रण का असर पड़ेगा। यही वजह है कि दुनिया के कई देश इन चुनावी नतीजों को करीब से देख रहे हैं। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या ट्रंप को संसद का समर्थन मिलेगा या विपक्ष उनके आखिरी दो साल के कार्यकाल को राजनीतिक संघर्ष में बदल देगा?